Saturday, 16 May 2020

भौतिकी का पांचवां बल

चंद्रभूषण
क्या भौतिकशास्त्र की बुनियाद हिलने वाली है? एक सदी से जो सिद्धांत इसे थामे हुए हैं, क्या उनमें भारी रद्दोबदल का वक्त आ गया है? एक विचित्र खीझ पिछले कई दशकों से भौतिकशास्त्रियों को लपेटे में लिए हुए है। 1920 के दशक में स्थापित दो सिद्धांतों थिअरी ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम मेकेनिक्स के जरिये सूक्ष्म से लेकर विराट तक लगभग हर प्रेक्षण की व्याख्या हो जाती है। हालांकि इन सौ सालों में प्रेक्षणों का स्तर दोनों पैमानों पर बहुत आगे जा चुका है।

समस्या दो जगहों से आ रही है। सिद्धांत के स्तर पर यह कि थिअरी ऑफ रिलेटिविटी जिस गुरुत्व के इर्दगिर्द घूमती है, उसकी क्वांटम मेकेनिक्स में कोई व्याख्या नहीं है। और व्यवहार के स्तर पर यह कि कुछ बड़े प्रेक्षणों की व्याख्या न क्वांटम मेकेनिक्स के पास है, न थिअरी ऑफ रिलेटिविटी के पास। मसलन, ब्रह्मांड का फैलना। प्रेक्षण बता रहे हैं कि यह 72 किलोमीटर प्रति सेकंड प्रति मेगापारसेक की रफ्तार से फैल रहा है। यानी हमसे 33 लाख प्रकाश वर्ष दूर स्थित नीहारिकाएं 72 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से दूर भाग रही हैं और वे 33 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर हुईं तो उनके दूर भागने की रफ्तार 7200 किमी प्रति सेकंड है।

भौतिकी के चार मूल बलों में सभी की प्रवृत्ति पास खींचने की ही है। दूर भगाने का गुण सिर्फ विद्युत चुंबकीय बल में है, वह भी तब जब समान आवेश वाले पिंड आसपास हों। ग्रहों, तारों, नीहारिकाओं पर कोई आवेश होता नहीं, फिर यह कौन सा अज्ञात बल है जो उन्हें एक-दूसरे से दूर भगा रहा है? हंगरी के भौतिकशास्त्री अत्तिला क्रास्नाहोर्के 2015 से इस पांचवें बल की बुनियाद सूंघ लेने का दावा कर रहे हैं, हालांकि उन्हें गंभीरता से लेने की शुरुआत पिछले साल ही हुई है।

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