Monday, 27 April 2020

बढ़ रही है दुष्ट लहरों की ऊंचाई

चंद्रभूषण
समुद्री सचाइयों और जहाजी गप्पों के बीच फर्क करना सदा से एक कठिन काम रहा है। गहरे समुद्र में कई-कई दिन थपेड़े खाने के बाद बचाए गए नाविकों ने ऐसे किस्से पहले भी सुनाए हैं कि समुंदर एकदम शांत था, तभी अचानक एक बहुत ऊंची लहर उठी और उनकी नाव को निगल गई। लेकिन ऐसे किस्सों को सच मानने या न मानने की दुविधा पहली बार 1826 में बनी, जब फ्रांसीसी नौसेना के कप्तान जूल ड्यूमां द’उर्विल ने हिंद महासागर में अपने तीन साथियों के साथ 33 मीटर (108 फुट) ऊंची एक लहर दर्ज करने की बात सार्वजनिक की और वैज्ञानिक फ्रांस्वा अरागो ने इसके लिए उनका मजाक उड़ाया।

फिर महान जर्मन गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गॉस ने अपने सांख्यिकी सिद्धांतों से हिसाब लगाकर बताया कि किसी तूफानी समुद्र में अगर 12 मीटर यानी चौमंजिला इमारत जितनी ऊंची लहरें उठ रही हों तो भी वहां कोई लहर 15 मीटर से ज्यादा ऊंची नहीं आ सकती। यह भी कि 30 मीटर ऊंची लहर का नंबर अगर कभी आएगा भी तो 10 हजार साल में एक बार से ज्यादा नहीं। लेकिन 1984 में शांत समुद्र में 11 मीटर ऊंची लहर दर्ज किए जाने से लेकर अब तक के हजारों प्रेक्षणों ने गॉस के इस गणित को गलत साबित किया है।

आधुनिक समुद्री जहाजों में लहरों की ऊंचाई लगातार दर्ज करते रहने का इंतजाम होता है। कुल लहरों में दो-तिहाई ऊंची लहरों की औसत ऊंचाई को ‘सिग्नीफिकेंट वेव हाइट’ (एसडब्लूएच) और इसकी दोगुनी से भी ऊंची लहर को 'रोग वेव' (दुष्ट लहर) का नाम दिया गया है। पिछले महीने छपी साउथंपटन यूनिवर्सिटी की उत्तरी अटलांटिक में 22 वर्ष (1994-2016) के जहाजी आंकड़ों पर आधारित एक रिसर्च  बता रही है कि समय बीतने के साथ दुष्ट लहरों की संख्या कम हो रही है लेकिन इनकी ऊंचाई ज्यादा होती जा रही है। यह भी कि ठंडे, शांत समुद्रों में इनका खतरा बहुत बढ़ गया है।

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