Friday, 18 October 2019

सृष्टि क्या यह तारा बनाने के बाद रची गई?

चंद्रभूषण

धरती से 190 प्रकाशवर्ष दूर स्थित मेथुसेलह नाम का एक तारा खगोलविज्ञानियों के लिए बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है। इसकी त्रिज्या सूरज की ठीक दोगुनी है। यानी इसका घनत्व अगर सूरज जितना होता तो इसका वजन सूरज के आठ गुने के आसपास होता। लेकिन इसके वजन की माप सूरज की अस्सी फीसदी ही निकलती है। दूसरे शब्दों में कहें तो इसका घनत्व सूरज के दसवें हिस्से के बराबर निकलता है। इसकी वजह यह है कि यह तारा मुख्यत: हाइड्रोजन और हीलियम से बना है। सूरज पर इफरात में मौजूद लोहे जैसी धातुएं इसमें न के बराबर हैं।

तारा भौतिकी की दृष्टि से यह अनोखी बात है और इससे पहली नजर में ही जाहिर होता है कि यह तारा बहुत पुराना है। उस वक्त की रचना, जब सृष्टि में धातुओं का कहीं नामोनिशान ही नहीं था! इस तारे का आधिकारिक नाम मेथुसेलह नहीं बल्कि एचडी 140283 है। मेथुसेलह नाम इसे बाइबल के सबसे बुजुर्ग चरित्र के आधार पर दिया गया, जिसकी उम्र वहां 969 साल बताई गई है। तारों की उम्र पता करने का एक जटिल शास्त्र है और तारा अगर बहुत ज्यादा दूर न हो तो इस काम में काफी सटीक नतीजे तक पहुंचा जा सकता है।

मेथुसेलह के मामले में यह आंकड़ा शुरू में 20 अरब साल का निकला था, जिसे जल्द ही 16 अरब साल पर ला दिया गया। समस्या यह थी कि ब्रह्मांड की जो उम्र निकाली गई है, वह किसी भी सूरत में 13 अरब 80 करोड़ (गलती की रेंज 21 करोड़ ) साल से पीछे नहीं जाती। तो क्या मेथुसेलह ब्रह्मांड बनने, दूसरे शब्दों में कहें तो समय की शुरुआत के भी 2 अरब 20 करोड़ साल पहले से हमारे पड़ोस में टिमटिमा रहा है। भौतिकीविदों के लिए यह एक पागल कर देने वाली प्रस्थापना थी लिहाजा इस सदी के गुजरे 18 वर्षों में वे मेथुसेलह की उम्र के पीछे ही पड़ गए और खींचतान कर इसे 14 अरब 27 करोड़ साल तक ले आए।

ब्रह्मांड की उम्र से यह फिर भी 47 करोड़ साल ज्यादा निकलती थी, लेकिन तारे की उम्र के साथ लगभग 80 करोड़ साल आगे-पीछे गलती की रेंज लगाकर चलें तो इसकी उत्पत्ति को एक छोर तक ठेलकर 13 अरब 66 करोड़ साल पहले तक ले जाया जा सकता है। इस आधार पर भौतिकशास्त्री यह सोचकर राहत की सांस ले सकते हैं कि मेथुसेलह नाम के तारे का जन्म ब्रह्मांड की उत्पत्ति के 14 करोड़ साल बाद ही हो पाया था। बात यहीं निपट जाती तो ठीक था। लेकिन इसके समानांतर एक नई मुश्किल यह खड़ी होती जा रही है कि ब्रह्मांड की ही उम्र का हिसाब वक्त बीतने के साथ बिगड़ता जा रहा है और दिनोंदिन इसे नीचे सरकाना पड़ रहा है।

ब्रह्मांड के फैलाव को निरूपित करने वाले जिस हबल कांस्टैंट के मान पर इसकी उम्र निर्भर करती है, उसकी माप नवीनतम प्रेक्षणों के अनुसार अधिक दर्ज की जाने लगी है। फॉर्मूले में यह कांस्टैंट नीचे की तरफ आता है, यानी इसका मान बढ़ने पर ब्रह्मांड की उम्र कम निकलती है। 13 अरब 80 करोड़ साल इसकी उम्र हबल कांस्टैंट के 67.4 किलोमीटर प्रति मेगापारसेक मान पर निकाली गई थी, लेकिन अभी इसे 10 फीसदी ज्यादा यानी 73 या 74 किलोमीटर प्रति मेगापारसेक निकाला जा रहा है। इस आधार पर हिसाब लगाने के बाद ब्रह्मांड की उम्र 12 अरब 70 करोड़ साल ही निकलती है। यानी बुढ़ऊ स्टार अब भी ब्रह्मांड से पुराना ही जान पड़ता है!

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