Friday, 2 August 2019

सबसे स्थिर स्थिरांक

सबसे स्थिर स्थिरांक
चंद्रभूषण
137.03599913
एक अजीब संख्या, जिस पर भौतिकशास्त्री लट्टू रहते हैं। दशमलव का निशान छोड़ दें तो कुल 11 अंकों की ऊपर लिखी संख्या में ऐसी क्या खास बात है जिसने एक जमाने से भौतिकशास्त्रियों को इसका दीवाना बना रखा है? सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री इसे पूरे ब्रह्मांड का सबसे स्टेबल कॉन्स्टैंट मानकर चलते हैं, जबकि प्रायोगिक भौतिकशास्त्री ब्रह्मांड के सुदूरतम कोनों में इस संख्या के मान में थोड़ा बहुत भी झोल दिख जाने की जुगत में जुटे रहते हैं।

दरअसल यह भौतिकी के तीन सबसे बुनियादी स्थिरांकों- क्वांटम मेकेनिक्स में कदम-कदम पर इस्तेमाल होने वाला प्लैंक स्थिरांक h, निर्वात में प्रकाश का वेग c और इलेक्ट्रान पर मौजूद आवेश e का एक विशिष्ट मेल है। साथ में इसमें गणित के सबसे बुनियादी अनुपात पाई का तड़का भी लगा हुआ है। यह एक खास राशि hc / 2πe 2 का गणितीय मान है, जिसमें सारी इकाइयां एक-दूसरे कट जाती हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह सिर्फ एक संख्या है, जिसका आठ दशमलव अंकों तक मान 137.03599913 आता है।

यह भी दिलचस्प है कि इतने महत्वपूर्ण स्थिरांक को अभी तक कोई नाम नहीं दिया गया है। अलबत्ता इसकी उलट राशि (1 में इसका भाग देने पर मिलने वाली संख्या) को ग्रीक अक्षर अल्फा के रूप में लिखा जाता है और इसे फाइन स्ट्रक्चर कॉन्स्टैंट (महीन ढांचा स्थिरांक) के रूप में जाना जाता है। इसका मूल्य 0.0072973525664 के करीब आता है, और यह ऊपर बताई गई अपनी विलोम संख्या जितना सटीक नहीं है।

हाल तक ऐसा समझा जाता था कि ब्रह्मांड के किसी भी छोर पर अल्फा के मान में दशमलव के तेरहवें स्थान तक भी कोई बदलाव नहीं आ सकता। लेकिन जैसे-जैसे इंसानी प्रेक्षणों का दायरा बढ़ता जा रहा है, कई अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर दर्ज किए गए आंकड़े इसमें जरा-मरा बदलाव भी दिखा रहे हैं। ऐसा प्रेक्षणों की गलती से भी हो सकता है और यह भी संभव है कि भौतिकी की सबसे बुनियादी मान्यता- ‘यह सृष्टि और इसके नियम हर जगह बिल्कुल एक-से हैं’- में ही कोई झोल हो। बहरहाल, इससे 137.03599913 के दुर्निवार आकर्षण में कोई कमी नहीं आने वाली।

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