Wednesday, 4 April 2018

चक्कर आने का क्या मतलब है ?


स्कन्द शुक्ला 
जब आप कहते हैं कि मुझे चक्कर आ रहा है , तो डॉक्टर जानना चाहते हैं कि चक्कर आने से आपका मतलब क्या है।
चक्कर आना , जिसे अँगरेज़ी में वर्टाइगो कहा गया है , कई बार स्पष्ट रूप से रोगी समझकर बता नहीं पाते। ऐसे में रोग को ठीक से पकड़ने में और उसके उपचार में समस्या आती है। कुछ बातों को ध्यान में रखकर वर्टाइगो को बेहतर समझा जा सकता है।
चक्कर आने का अर्थ अगर आँखों के आगे अँधेरा छाना और गिर पड़ने की स्थिति है , तो अमूमन यह हृदय के पम्प-कार्य या ख़ून के संचार से सम्बन्धित मामला है। इसे अँगरेज़ी में सिनकपी या नियर सिनकपी कहा गया है। बहुधा ऐसा खड़े होने पर ही अधिक होता है। ठीक से ख़ून मस्तिष्क में नहीं पहुँच पा रहा। ऐसा कई बीमारियों में हो सकता है , जिन्हें हृदयरोग विशेषज्ञ जाँचों के द्वारा पहचान सकते हैं। 
चक्कर की दूसरी स्थिति रोगी का असन्तुलित होने लगना है। इसे डिसइक्विलिब्रियम कहा गया है। ऐसा होने से उसके गिरने और चोटिल होने की आशंका रहती है। असन्तुलन पैदा करने वाले रोग अमूमन मस्तिष्क के होते हैं और उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट देखते हैं।
चक्कर की तीसरी बिरादरी शुद्ध वर्टाइगो है , जिसमें रोगी को लगता है कि उसके आसपास की चीज़ें घूम रही हैं और ऐसा होने से वह गिर पड़ेगा। यह लक्षण जिन रोगों में मिलता है , उन्हें नाक-कान-गला-रोगों के विशेषज्ञ देखते हैं।
चक्कर का चौथा प्रकार जो इन तीनों से अलग है , वह मानसिक है। वह इन सभी से भिन्न है और उसे मनोचिकित्सक द्वारा ठीक किया जाता है।
प्रयास करें कि अपने लक्षणों को और बेहतर समझें और डॉक्टर को उनसे और बेहतर अवगत कराएँ , ताकि आपके रोग की सही पहचान हो सके। लक्षणों की विस्तृत समझ बीमारी को जानने में बड़ी भूमिका निभाती है।
चक्कर आने की स्थिति में डॉक्टर रोगियों से कई बार आहार में कुछ बदलाव करने को कहते हैं। साथ ही उन्हें कुछ व्यायाम भी बताते हैं। नशे व तनाव से मुक्ति और अच्छी नींद की भी इसमें बड़ी भूमिका होती है। चक्कर की स्थिति में रोगियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें किसी भी तरह चोट न लगे। वाहन चलाते समय ऐसा कई बार हो जाता है ; ऐसे में बेहतर है कि ड्राविंग से परहेज़ किया जाए।


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