Wednesday, 6 February 2013

आंसुओं में छिपे हैं कई रहस्य


आखिर कोई इंसान रोता क्यों हैं? इसकी व्याख्या कई तरह से की जाती है. कभी व्यक्ति खुशी में, तो कभी दुख में, तो कभी दर्द में रोता है. लेकिन, वैज्ञानिक पहलू से देखें, तो रोना एक अद्भुत ही विषयवस्तु है. न्यूरोलॉजिस्ट माइकल ट्रिंबल के मुताबिक, जब इंसान भावनाओं से अभिभूत हो जाता है, तो भावनाओं को संप्रेषित करने के लिए उसकी आंखों से आंसू निकलने लगते हैं. प्रोफेसर ट्रिंबल के मुताबिक, हमारे विकास के दौरान कभी एक ऐसा भी वक्त रहा होगा, जब आंसुओं का कार्य सामान्य बायोमैकेनिकल क्रियाकलाप (आंखों की नमी बनाये रखना) के अलावा अन्य भी कुछ होता था. प्रोफेसर ट्रिंबल अब इस रहस्य की गुत्थी सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं कि जीवों की दुनिया में सिर्फ हमारी (मनुष्य) ही प्रजाति एकमात्र ऐसी क्यों है, जिनकी आंखों से गुस्से के दौरान भी आंसू निकलते हैं. गौरतलब है कि आंसुओं का मुख्य कार्य हमारी आंखों की नमी बनाये रखना होता है. इतना ही नहीं, इनमें प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण कारक भी होते हैं, जो आंखों को स्वस्थ बनाये रखते हैं और संक्रमण से भी लड.ते हैं.
बच्चे पढ. सकते हैं आपका दिमाग
को ई व्यक्ति क्या सोच रहा है, इसका पता लगाना कभी भी आसान नहीं रहा है. हालांकि, मनोवैज्ञानिक इस मामले में थोड.ी बेहतर स्थिति में होते हैं और वे व्यक्ति के मस्तिष्क को पढ.-समझ सकते हैं. लेकिन, अगर कोई आपसे कहे कि महज 18 महीने का बा भी आपके मस्तिष्क को पढ. सकता है, तो एक पल को आप इस पर जरा भी यकीन नहीं करेंगे. पर, यह बिल्कुल सच है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं का भी यही कहना है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की मानसिक क्षमता व्यक्ति के जीवन में उम्र के विभित्र पड.ावों पर विकसित होती है. लेकिन, छोटे बाों में अकसर यह क्षमता होती है कि वे वयस्कों की मस्तिष्क को समझ सकते हैं और वे क्या सोच रहे हैं, इसका भी अनुमान लगा सकते हैं. शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन चीन, इक्वाडोर और फिजी जैसे कई देशों के छोटे बाों पर किया. इस आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि बो मस्तिष्क पढ.ने की क्षमता काफी पहले विकसित कर लेते हैं, जबकि पहले के शोधों में ठीक इसके उलट बात कही गयी थी

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