Wednesday, 23 May 2012

उर्जा देश के विकास का ईंधन है

उर्जा किसी देश के विकास के ईंजन का ईंधन है. प्रति व्यक्ति औसत उर्जा खपत वहाँ के जीवन स्तर की सूचक होती है. इस दृष्टि से दुनियाँ के देशों मे भारत का स्थान काफ़ी नीचे है . देश की आबादी बढ़ रही है. बढ़ती आबादी के उपयोग के लिए और विकास को गति देने के लिए हमारी उर्जा की मांग भी बढ़ रही है द्रुतगाति से देश के विकास के लिए औद्योगीकरण, परिवहन और कृषि के विकास पर ध्यान देना होगा. इसके लिए उर्जा की आवश्यकता है. दुर्भाग्यवश उर्जा के हमारे प्राकृतिक संसाधन बहुत ही सीमित है. खनिज तेल पेट्रोलियम, गैस, उत्तम गुणवत्ता के कोयले के हमारे प्राकृतिक संसाधन बहुत ही सीमित हैं. हमें बहुत सा पेट्रोलियम आयात करना पड़ता है. हमारी विद्युत की माँग उपलब्धता से कही बहुत ज़्यादा है. आवश्यकता के अनुरुप विद्युत का उत्पादन नहीं हो पा रहा है. बरसात कम होने की वज़ह से बड़े बड़े जलाशय और नदियाँ सूखती जा रही हैं. हमारे यहाँ उपलब्ध कोयला भी गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम नहीं है. इसका उत्खनन भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो पा रहा है. जल विद्युत के उत्पादन को लेकर पर्यावारनाविदों की ओर से एतराज़ जताया जाता है. इसका गेस्टेशन पीरियड भी बहुत ज्यादा है. थर्मल पावर प्लांट अत्यधिक प्रदूषण पैदा करते है. हमारे यहाँ प्राकृतिक संसाधन के रूप में उपलब्ध कोयला भी गुणवत्ता की दृष्टि से आवश्यकता के अनुरूप नहीं है. इसमें ऊष्मा कम और ऐश कंटेंट ज्यादा है. नाभिकीय उर्जा ( न्यूक्लियर उर्जा ) के उत्पादन की अपनी सीमाएं हैं. ईंधन के तौर प्रयोग में आने वाले यूरेनियम के संसाधन भी हमारे यहाँ बहुत सीमित हैं. यह हमें आयात करना पड़ता है, जिसमें निर्यात करने वाले देश हमारी स्वतंत्र परमाणु नीति के कारण, तरह- तरह की शर्तें लगाते हैं. इन सब कमियों की वजह से हमारी विद्युत् उत्पाद क्षमता पर विपरीत असर पड रहा है. देश एक भीषण उर्जा संकट से गुज़र रहा है. उर्जा की कमी देश के विकास और अवरुद्ध कर रही है. आइए कुछ विकल्पों पर विचार कर लेते हैं.. नाभिकीय या न्युक्लियर उर्जा Radio Active पदार्थ के नाभिकीय विखंडन से उत्पन्न होती है. यह आने वाले काफ़ी समय तक हमारी उर्जा की आवश्यकताओं की आपूर्ति कर सकती है. इसकी तकनीकी हमारे यहाँ उपलब्ध है और कुछ न्यूक्लियर पावर प्लांट सीमित मात्रा में विद्युत् उत्पादन भी कर रहे हैं.. लेकिन समस्या यहाँ भी वही आती है. इसमें ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम की प्राकृतिक उपलब्धता हमारे यहाँ बहुत सीमित है. बाहर से यूरेनियम मिलने में दिक्कत है. अमेरिका के साथ न्यूक्लियर समझौता होने से इस समस्या का समाधान निकट लगता है. फिर भी यूरेनियम की आपूर्ति के लिए हमे विदेशों से आयात पर निर्भर रहना होगा. उर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अति आवश्यक है. अन्यथा निर्यातक देश अपनी बात मनवाने के लिए कभी भी यूरेनियम की आपूर्ति बंद कर सकते हैं. यूरेनियम का विकल्प थोरियम हमारे यहाँ प्रचुर मात्रा में मौजूद है. लेकिन इसको उपयोग में लाने के लिए समन्धित ‘ Fast Breeder Reactor ‘ तकनीकी अभी हमारे यहाँ पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है. आशा है हमारे वैज्ञानिक इस कार्य को जल्दी ही पूरा करेंगे. तब हमारी विदेशों पर निर्भरता क़म होगी और उर्जा के क्षेत्र में हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सकेंगे. इसके अतिरिक्त और भी काई विकल्प मौजूद हैं, यद्यपि क़ि इनकी उपयोगिता सीमित है. पवन चक्की ( Wind Mill ) से विद्युत उत्पन्न क़ी जा रही है. समुद्र के ज्वार भाटा से भी विद्युत पैदा करने क़ी संभावनाएँ हैं. भू- तापीय उर्जा ( Geothermal energy ) से भी विद्युत उत्पादन संभव है. सौर उर्जा ( Solar Energy ) : — सूर्य से प्राप्त होने वाली उर्जा हमारे लिए अत्यंत आकर्षक विकल्प है. सूर्य एक कभी न समाप्त होने वाली अक्षय उर्जा का स्रोत है. सौर उर्जा प्रदूषण रहित, निर्बाध गति से लगभग साल के बारहों महीने मिलने वाली सबसे सुरक्षित उर्जा का स्रोत है. यह मुफ़्त उपलब्ध है. इसके लिए सूर्य कोई कीमत नहीं वसूल करता है. सौर उर्जा को लेकर भारत विशेष रूप से लाभ की स्थिति में है, क्योंकि हमारे यहाँ यह लगभग बारहों मास उपलब्ध रहती है. सौर उर्जा को फोतोवॉलटाइक सेल द्वारा विद्युत में परिवर्तित करने क़ी तकनीकी अब हमारे देश में उपलब्ध है. यह तकनीकी अभी जल विद्युत और थर्मल उर्जा से कुछ मंहगी ज़रूर है, लेकिन औद्योगिक स्तर पर उत्पादन होने पर कीमत क़म हो जाएगी. अनुसंधान के द्वारा फोतोवॉल्टाइक सेल क़ी कार्य क्षमता भी बढ़ायी जाने की भी संभावना है न्यूक्लियर उर्जा संबंधी Fast Breeder Reactor तकनीकी और सौर उर्जा विकसित करके हमें अपने संसाधनों का उपयोग करना चाहिए. उर्जा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें दूसरों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. हमें अपनी तकनीकी और अपने संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता हासिल करना होगा. हमारी तकनीकी हमारी आवश्यकताओं और संसाधनों के अनुरुप होनी चाहिए. यह दुःख का विषय है कि हमने सौर उर्जा के उपयोग पर ध्यान नहीं दिया. मेरा विचार है कि हमारी परिस्थितियाँ विषम होने के कारण हमें सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना होगा. हमारी एक बहुत बड़ी कमजोरी है कि हम अपने संसाधनों का उपयोग करने के बजाय दूसरों की नक़ल करना पसंद करते हैं.

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