Monday, 14 September 2020

खोदना है तो झुकना होगा


चंद्रभूषण

ऑस्ट्रेलिया में आदिवासी अधिकारों से जुड़ी एक बड़ी जंग जीत ली गई है। ब्रिटिश-ऑस्ट्रेलियाई मालिकाने वाली संसार की दूसरी सबसे बड़ी माइनिंग कंपनी रियो टिंटो ने आदिवासी आस्था के एक प्रतीक स्थल को तहस-नहस करने को लेकर अपने सीईओ जीन सेबेस्टिएन जाक को कंपनी से निकाल दिया है, साथ ही कंपनी के दो और बड़े अधिकारियों को भी बर्खास्त कर दिया है। आगे के लिए सख्त नसीहत के साथ यह जिल्लत उसे पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में झेलनी पड़ी है, जहां आदिवासियों का प्रभाव भी कुछ खास नहीं है। 

लगभग भारत जितने क्षेत्रफल में लखनऊ से कम आबादी वाला ऑस्ट्रेलिया का यह सबसे बड़ा प्रांत हर साल दुनिया का 32 प्रतिशत लोहा, 11 प्रतिशत अल्युमिनियम और 6 प्रतिशत सोना उपजाता है और इसका ज्यादातर फायदा रियो टिंटो के ही खाते में जाता है। लेकिन 2013 में कुराना और पिनिकुरा कबीलों के एतराज के बावजूद उसने लाल रेगिस्तानी इलाके जूकान खड्ड में खुदाई करने का फैसला किया, क्योंकि वहां उसे काफी अच्छा लौह अयस्क मिलने की उम्मीद थी। 


इस इलाके की कुछ गुफाओं की कार्बन डेटिंग से पता चला है कि यह सतत निवास वाली दुनिया की कुछ सबसे पुरानी जगहों में एक है। 46 हजार साल से इंसानों का आवास बनी इन गुफाओं में चार हजार साल पुरानी एक चोटी भी मिली है, जिसमें कई लोगों के बाल गुंथे हुए हैं। इन बालों के जेनेटिक विश्लेषण से पता चला कि ये कुराना कबीले के ही पूर्वजों के बाल हैं- बिल्कुल अभी के जैसे, पर 4000 साल पुराने! आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं के दबाव में रियो टिंटो को लिखित में मानना पड़ा है कि आगे से स्थानीय आबादी को भरोसे में लिए बगैर वह कोई खुदाई नहीं करेगी।

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