Saturday, 12 October 2019

कम ऑक्सीजन का गम

कम ऑक्सिजन का गम
चंद्रभूषण
शरीर में ऑक्सिजन सप्लाई लगातार कम रहने से होने वाली बीमारी हाइपॉक्सिया आजकल चर्चा में है तो इसकी खास वजह इस बार का मेडिसिन नोबेल ऐसी बीमारियों की जड़ तक जाने वाली रिसर्च को दिया जाना है। खून में ऑक्सिजन कम होने की समस्या हाइपॉक्सीमिया और पेशियों में ऑक्सिजन के क्रॉनिक अभाव से पैदा होने वाले हाइपॉक्सिया की फौरी वजहें भी हो सकती हैं लेकिन समुद्र तल से 2500 मीटर (8200 फुट) या अधिक ऊंचाई पर रहने वालों में यह ज्यादा देखने में आता है।

गनीमत है कि भारत में ऐसी जगहें न के बराबर हैं। देसी हिल स्टेशनों में इतना ऊंचा अकेला गुलमर्ग है, जो कोई स्थायी बस्ती न होकर एक टूरिस्ट स्पॉट भर है। पारंपरिक बसावट वाले ऐसे इलाके दुनिया में तीन ही हैं। एक हमारा पड़ोसी तिब्बत, दूसरा पूर्वी अफ्रीका में केन्या, तंजानिया और युगांडा के कुछ इलाके, और तीसरा दक्षिणी अमेरिका में एंडीज पर्वतमाला के देश पेरू और बोलीविया। इवॉल्यूशन ने दसियों हजार वर्षों में इन तीनों जगहों पर हाइपॉक्सिया और इसके बृहद रूप क्रॉनिक माउंटेन सिकनेस (सीएमएस) से लड़ने के तीन तरीके ईजाद किए हैं।

पूर्वी अफ्रीकियों के खून में हीमोग्लोबिन बहुत ज्यादा पाया जाता है, जिसके चलते उनमें सीएमएस के मामले बिल्कुल नहीं देखे जाते। तिब्बत में लोग जल्दी-जल्दी सांस लेने के आदी हो चुके हैं जिससे वातावरण में ऑक्सिजन कम होने के बावजूद शरीर में इसकी आपूर्ति संतुलित रहती है। लेकिन एंडियन इलाकों में मनुष्य पहुंचा ही 15,000 साल पहले, लिहाजा वहां 15 से 20 फीसदी लोग सीएमएस के शिकार देखे गए हैं। इस साल के मेडिसिन नोबेल ने जरूर उनकी उम्मीद बढ़ाई होगी।

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