Saturday, 14 September 2019

शुद्ध गणित का जादू

और विज्ञानों से अलग है शुद्ध गणित का जादू
चंद्रभूषण
एक विज्ञान के रूप में गणित की छवि किसी तपस्वी की साधना जैसी ही है। इसकी क्रांतिकारी खोजें भी प्राय: अचर्चित रह जाती हैं। या चर्चित होने में उन्हें इतना वक्त लगता है कि जब-तब खोजी के लिए ही अपनी खोज बेमानी हो जाती है। इसके दो उज्ज्वल अपवाद यूनान के आर्किमिडीज और ब्रिटेन के आइजक न्यूटन हैं, जो जितने बड़े गणितज्ञ थे, उतने ही बड़े मिलिट्री साइंटिस्ट भी थे। उनका असर जितना आने वाले समय पर पड़ा, उतना ही अपने समय पर भी दर्ज किया गया। बतौर गणितज्ञ दोनों की हैसियत को उनके शाही रुतबे के चलते कभी कम करके नहीं आंका गया। लेकिन पिछली सदी में इस खेल के नियम बदल गए।

जी. एच. हार्डी ने ( भारतीय जीनियस श्रीनिवास रामानुजन को दुनिया के सामने लाने के लिए हम जिनके प्रति कृतज्ञ हैं ) अपने निबंध 'अ मैथमेटिशियंस अपॉलजी' में प्योर मैथमेटिक्स और एप्लाइड मैथमेटिक्स को बिल्कुल अलग-अलग चीजों की तरह देखा है। वे अपना जीवन एक ऐसे गणित के प्रति समर्पित बताते हैं, जिसका कोई व्यावहारिक महत्व नहीं है। इसका उन्हें कोई दुख भी नहीं है। अलबत्ता एक संतोष है कि अपनी जिंदगी उन्होंने एक सौंदर्य की खोज में लगाई है, किसी के लिए मुनाफा कमाने या युद्ध जीतने की कवायद में नहीं।

यह बात और है कि अंकगणित से जुड़ा हार्डी और रामानुजन का बहुत सारा काम द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान (यानी अपॉलजी लिखे जाते समय भी) कूट संकेतों के विज्ञान क्रिप्टॉलजी में इस्तेमाल हो रहा था और इसके बारे में उन्हें पता तक नहीं था। इंसान का लालच और उसकी खुदगर्जी संसार की हर चीज का इस्तेमाल कर सकती है। प्योर मैथमेटिक्स के पुजारी किसी भी गिरि-कंदरा में छिप जाएं, धंधेबाज लोग वहां से भी उनके काम को खोज लाएंगे और अपने धंधे में लगा लेंगे। लेकिन हार्डी के निबंध का मूल तत्व प्योर मैथमेटिक्स को महिमामंडित करने का नहीं, गणित के उस दूसरे पहलू को सामने लाने का है, जो अपने सौंदर्य में पेंटिंग, संगीत या कविता जैसा और सत्य के प्रति अपने आग्रह में दर्शन जैसा है।

अभी के समय में रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमान हार्डी के इन मानकों पर सबसे ज्यादा खरे उतरते हैं, हालांकि अपनी ही दुनिया में मगन रहने वाले इस गणित साधक के बारे में उसके करीबी लोगों का कहना है कि गणित से उनका रिश्ता अब बीते दिनों की बात हो चुका है। काफी खटास भरे एक प्रकरण के बाद उन्होंने खुद को अपने दूसरे शौकों, जैसे पियानो बजाने और टेबल टेनिस खेलने तक सिमटा लिया है।

गणित के सामने मौजूद सहस्राब्दी की सात सबसे बड़ी चुनौतियों में एक प्वांकारे कंजेक्चर (जिसका कुछ सिर-पैर जानने के लिए आपको सतहों के उतार-चढ़ाव और घुमाव से जुड़े टोपॉलजी के कठिन शास्त्र में घुसना पड़ेगा) को उन्होंने हल किया, लेकिन इसके लिए मिले फील्ड्स मेडल और दस लाख डॉलर के मिलेनियम अवार्ड को यह कह कर ठुकरा दिया कि गणित के क्षेत्र में आ रही अनैतिकता को बर्दाश्त करने की प्रवृत्ति उन्हें इनको अपनाने से रोक रही है।

दरअसल, गणित का नोबेल कहे जाने वाले फील्ड्स मेडल से विभूषित चीन के दो गणितज्ञों ने ग्रिगोरी पेरेलमान की खोज का श्रेय अपने देश के ही दो चेलों को देने का प्रयास किया, हालांकि इस पूरे एपीसोड का अंत चीनी गणितज्ञों के माफीनामे और उनके द्वारा अपनी रिसर्च वापस लेने के रूप में हुआ। गणित की दुनिया के लिए ऐसे कथित 'राष्ट्रवादी प्रयास' बिल्कुल बेमानी माने जाते रहे हैं, लेकिन दुनिया को अपने ठेंगे पर रखने वाले गणितज्ञ भी आजकल चीनियों की आर्थिक हैसियत के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

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