Saturday, 29 June 2019

गर्मी और हीटवेव में झुलसा यूरोप

हीट वेव में झुलसा यूरोप
चंद्रभूषण
यूरोप में ठेठ गर्मियों के महीने जुलाई-अगस्त माने जाते हैं। 70,000 लोगों की जान लेने वाली सन 2003 की ऐतिहासिक यूरोपियन हीट वेव इन्हीं महीनों में आई थी। जून का हाल वहां हमारे मार्च जैसा खुशनुमा ‘अर्ली समर’ वाला होता है। लेकिन इस साल जून के महीने में ही यूरोप में गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं। इस हफ्ते शुक्रवार-शनिवार को कई यूरोपीय शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार चले जाने की आशंका जताई गई है।

अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में दिखा यह टेंपरेचर यूरोप के लिए आसमान टूटने जैसा है। लोगों का शरीर वहां की ठंड में रहने का आदी होता है। ज्यादातर यूरोपीय घरों में एयर कंडीशनर तो दूर, पंखे तक नहीं लगे हैं। नतीजा यह कि आजाद खयाल गोरे लोग गर्मी से राहत पाने के लिए बियर या किसी ज्यादा सख्त अल्कॉहलिक पेय की बोतलें पकड़कर तालाब, झील या नदी में घुस जाते हैं। वहां कुछ देर बाद सिर पर गर्मी और नशा एक साथ चढ़ जाने के चलते वे ऊंघ और बेहोशी के बीच की दशा में चले जाते हैं और कई बार इसी हाल में डूबकर मरे हुए पाए जाते हैं।

कुछ लोग इतनी गर्मी में ऊलजलूल हरकतें भी करने लगते हैं। जर्मनी की राजधानी बर्लिन को घेरे हुए एनसीआर नुमा प्रांत ब्रैंडेनबर्ग की पुलिस ने भरी दोपहरी में खुली सड़क पर अंधाधुंध मोपेड भगा रहे एक बुजुर्ग सज्जन को रोककर उनकी तस्वीरें जारी की हैं। हेल्मेट तो क्या इस कृत्य के समय उनके तन पर कपड़े की एक चिंदी भी नहीं दिख रही। वजह पूछने पर बोले- ‘गर्मी लग रही थी, क्या करता!’

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