Saturday, 11 July 2015

टाटा-इसरो ने बनाई हाइड्रोजन बस

देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता टाटा मोटर्स और भारतीय अंतरिक्ष संस्थान इसरो ने हाइड्रोजन चालित बस का विकास किया है। कई सालों के शोध के बाद तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो केंद्र में रविवार को इस बस का प्रदर्शन किया गया। इसकी खासियत यह है कि इससे प्रदूषण नहीं फैलता।इसरो अधिकारियों ने बताया कि वह क्रायोजेनिक तकनीक पर कई साल से काम कर रहे थे। इस बस को पूरी तरह से क्रायोजेनिक तकनीक पर आधारित नहीं कहा जा सकता। यह सीएनजी टाइप बस है। हाइड्रोजन को बोतलों में भरकर बस की छत पर लगाया जाता है। इसमें लिक्विड हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया गया है। इसमें इसरो को विशेषज्ञता हासिल है। बस को ऊर्जा देने के लिए टाटा-इसरो ने फ्यूल सेल पावर सिस्टम (एफसीपीएस) का विकास किया है। शोध टीम की कमान इसरो के मानद सलाहकार वीजी गांधी के हाथ में थी। इस बस के लिए इसरो और टाटा मोटर्स ने 2006 में एमओयू पर हस्ताक्षर किया था।
गांधी ने बताया कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए यह क्रांति का समय है। टाटा के सहयोग से हमने प्रदूषण रहित वाहन बनाने में सफलता हासिल की है। हमने इसे हर तरह से सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया है। सरकार ने हाइड्रोजन वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिशानिर्देश भी तैयार किए हैं। गांधी ने कहा कि यह भविष्य का ईधन है। फिलहाल, 20 से 120 किलोवाट के एफसीपीएस विकसित किए गए हैं। इसके विभिन्न प्रयोग सफल रहे थे। यह बस न केवल प्रदूषण घटाएगी बल्कि क्रूड का आयात कम करने में भी मदद देगी। इसका वाणिज्यिक इस्तेमाल कब से हो सकेगा इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

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