Saturday, 19 July 2014

आविष्कारों में जुगाड़ की प्रवृत्ति

प्रसिद्ध वैानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने कहा है कि आविष्कारों को सस्ता बनाने के चक्कर में जुगाड़ की प्रवृत्ति के कारण विश्व के वैानिक समुदाय में भारत की छवि खराब है। पणजी में कला अकादमी में आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने कहा, ‘जुगाड़ की प्रवृत्ति के कारण दुनिया में आविष्कार के क्षेत्र में भारत की छवि खराब है। भारत में जैसे-तैसे केवल लागत पर विचार किया जाता है, सुरक्षा पर नहीं।’ गोवा में जन्मे 71 वर्षीय माशेलकर ने कहा कि वह निजी रूप से इस प्रकार के जुगाड़ से सहमत नहीं हैं। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर और अन्य उच्चाधिकारियों के समक्ष उन्होंने कहा कि हम चीजों की उपेक्षा करते हैं और जैसे-तैसे चीजों की व्यवस्था करते हैं। यह मुङो पसंद नहीं है। माशेलकर का कहना है कि भारत को सस्ती उत्कृष्टता के विचार का समर्थन करने की जरूरत है। वह इस विचार का प्रचार कर रहे हैं। उनके मुताबिक हमें ऐसी उच्च प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना चाहिए जिससे चीजें सस्ती बन सकें। उन्होंने कहा कि विान को समाज और लोगों के लिए प्रासंगिक और प्रभाव डालने वाला होना चाहिए। काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्टियल रिसर्च (सीएसआइआर) के प्रमुख रह चुके माशेलकर ने समारोह में अपने बचपन का किस्सा भी सुनाया जब वह स्ट्रीट लाइट के पोल के नीचे पढ़ा करते थे। उन्होंने कहा कि जीवन में कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और सरल उपायों से काम नहीं हो सकता है। कड़ी मेहनत की बदौलत से ही ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है, अन्य माध्यमों से नहीं।

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