Friday, 15 November 2013

हिग्स बोसॉन और हॉकिंग

आइंस्टाइन के बाद आधुनिक भौतिकी के सबसे ज्यादा परिचित चेहरे स्टीफन हॉकिंग को उनके खोजी दिमाग के अलावा अलमस्त स्वभाव और सोच के चुलबुलेपन के लिए भी जाना जाता है। जिस हिग्स बोसॉन को इस सदी की सबसे बड़ी खोज कहा जा रहा है और जिसकी प्रस्थापना देने वाले पीटर हिग्स और फ्रांसुआ आंग्लेया को इस साल भौतिकी का नोबेल भी मिल चुका है, उसके बारे में हिग्स का कहना है कि इस खोज ने फिजिक्स को ऊबाऊ बना दिया है। उनके मुताबिक हिग्स बोसॉन की खोज ने उन्हें दो स्तरों पर नुकसान पहुंचाया है।
एक तो वह सौ डॉलर की शर्त हार गए, जो एक अमेरिकी वैज्ञानिक के साथ इस बात के लिए लगाई थी कि हिग्स बोसॉन कभी खोजा ही नहीं जाएगा। दूसरे, अगर यह कण नहीं खोजा गया होता तो द्रव्यमान की व्याख्या करने के लिए वैज्ञानिकों को कई सारी अटकलें लगानी पड़तीं, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों पर रोशनी पड़ती। बहरहाल, हॉकिंग की इस बात को उनके खिलंदड़ेपन का ही हिस्सा माना जाना चाहिए।
सचाई यह है कि पिछले कुछ दशकों में भौतिकी की फ्रंटलाइन प्रस्थापनाओं को अंधेरे में बिल्ली पकड़ने की कसरत माना जाने लगा था। भला ऐसी थ्योरी का क्या फायदा, जिसे न गलत साबित किया जा सके, न सही। आधुनिक भौतिकी की सबसे गहरी उलझनों की सबसे प्रामाणिक व्याख्या का दावा करने वाली स्ट्रिंग थ्योरी की आलोचना में तो बाकायदा एक किताब ही आ गई, जिसका शीर्षक था- 'नॉट इवन रांग।' यानी एक ऐसा सिद्धांत, जिसको सही तो क्या, गलत भी सिद्ध नहीं किया जा सकता।
हिग्स बोसॉन की खोज के बाद यह तो हुआ है कि पदार्थ की सब-एटॉमिक स्तर पर व्याख्या करने वाले स्टैंडर्ड मॉडल की पूरी तरह पुष्टि हो गई है। इस मॉडल के सामने अभी कई चुनौतियां हैं। मसलन, गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रैविटी की कोई व्याख्या इसमें नहीं है, और ब्रह्मांड की वृहद स्तरीय व्याख्या के लिए डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की जो प्रस्थापनाएं दी गई हैं, उनके बारे में भी यह मॉडल पूरी तरह चुप है। लेकिन इन चीजों की व्याख्या के लिए किसी ज्यादा बड़े सिद्धांत की जरूरत हो सकती है। जब तक वह नहीं खोजा जाता, तब तक हिग्स बोसॉन द्वारा प्रमाणित स्टैंडर्ड मॉडल सूक्ष्म स्तर पर उसी तरह सत्य माना जाता रहेगा, जैसे वृहद स्तर पर न्यूटन के ग्रैविटी मॉडल को सैकड़ों साल तक अंतिम सत्य माना जाता था।(ref-nbt.in)

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