Friday, 26 April 2013

गणित के सिरमौर -रामानुजन की पुण्यतिथि पर दैनिक जागरण में लेख

शशांक द्विवेदी 
Dainik Jagran
आज के दैनिक जागरण में मेरा विशेष लेख
आज गणित के क्षेत्र में विलक्षण प्रतिभा के धनी रामानुजन की पुण्यतिथि है .उन पर लेख लिखने से पहले मैंने उनके बारें में बहुत ज्यादा पढ़ा ,पढकर मै हैरान रह गया रामानुजन के जीवन चरित्र से हमारी शिक्षा व्यवस्था का खोखलापन  उजागर होता है। 13 वर्ष की अल्पायु में रामानुजन् ने अपनी गणितीय विश्लेण की असाधारण प्रतिभा से अपने सम्पर्क के लोगों को चमत्कृत कर दिया मगर भारतीय शिक्षा व्यवस्था ने उन्हें असफल घोषित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था। वास्तव में हमारी शिक्षा व्यवस्था में विलक्षण बालकों के लिए कोई स्थान नहीं है। १२ वी की परीक्षा में गणित के अलावा वो सभी विषय में फेल हो गये थे .बिना डिग्री लिए ही रामानुजन् को औपचारिक अध्ययन छोड़ना पड़ा। अपने अध्ययन के बल पर रामानुजन् कभी भी डिग्री प्राप्त नहीं कर सके। लेकिन उनके कार्यों और योग्यता को देखते हुए ब्रिटेन ने उन्हें बी ए की मानद उपाधि दी और बाद में उन्हें पी एच डी की भी उपाधि दी । यहाँ पर एक सवाल उठता है कि क्या यह भारत में संभव था या है क्योंकि हमारी शिक्षा व्यवस्था ने तो रामानुजन को हर तरह से नकार ही दिया था । .वो तो सिर्फ अपनी विलक्षण प्रतिभा और प्रो हार्डी जैसे मित्रों की वजह से ही विश्व पटल पर आ पायें ।
देश एक बार फिर से गणित के क्षेत्र में दुनियाँ का सिरमौर बने इसके लिए युवा अथक प्रयास करें सिर्फ यही रामानुजन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी । 
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http://epaper.jagran.com/epaperimages/26042013/delhi/25ned-pg8-0.pdf






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