Tuesday, 8 January 2013

आइआइटी की सालाना फीस में 80 फीसद की वृद्धि

उच्च शिक्षा की बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) की सालाना फीस में 80 फीसद की वृद्धि हो गई है। शैक्षिक सत्र 2013 से आइआइटी में ग्रेजुएट स्तर पर दाखिला लेने वाले छात्रों को सालाना 50 के बजाय 90 हजार रुपये फीस भरनी होगी। छात्रों-अभिभावकों पर बोझ बढ़ाने वाले इस कड़े कदम के साथ ही इन हाई प्रोफाइल संस्थानों की जवाबदेही भी तय करने को हर पांच साल में उनकी समीक्षा का भी निर्णय लिया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्री डा. एमएम पल्लम राजू ने सोमवार को यहां काउंसिल की बैठक के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, फीस में समय-समय पर बदलाव भी होगा। ज्ञात हो, इससे पहले 2008-09 में आइआइटी की 25 हजार सालाना फीस को 50 हजार रुपये किया गया था। राजू ने कहा, मौजूदा दौर में आइआइटी को भी आत्मनिर्भर होना जरूरी है। अभी छात्रों की सालाना फीस व अन्य संसाधनों से खर्चो की सिर्फ 20 फीसद ही भरपाई हो पाती है। जबकि, भारतीय प्रबंध संस्थान (आइआइएम) अपने खर्चों के लिए काफी हद तक बेहतर संसाधन जुटाने में सक्षम हैं। एक सवाल के जवाब में कहा,आइआइटी की बढ़ी हुई फीस का असर करीब 50 फीसद उन छात्रों पर पड़ेगा, जो उसका भुगतान करने में सक्षम हैं। एससी, एसटी छात्रों से अभी भी ट्यूशन फीस नहीं ली जाती। हॉस्टल, भोजन व किताबें भी मुफ्त दी जाती हैं। आइआइटी में 4.5 लाख रुपये सालाना से कम पारिवारिक आय वाले छात्रों को शत-प्रतिशत स्कॉलरशिप की व्यवस्था की गई है। ऐसे छात्रों की संख्या कुल छात्रों का 25 फीसद है। आइआइटी काउंसिल ने इसके साथ ही काकोदकर कमेटी की उस सिफारिश पर भी मुहर लगा दी है, जिसमें आइआइटी के कामकाज की समीक्षा की बात कही गई थी। राजू ने कहा,समीक्षा का तौर-तरीका विश्वस्तरीय संस्थानों की समीक्षा जैसा होगा। समीक्षा कमेटी में प्रख्यात शिक्षाविद् व उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। आइआइटी की जवाबदेही व पारदर्शिता के मद्देनजर समीक्षा की पहल जल्द से जल्द होगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) के दाखिलों में लड़कों की तुलना में लड़कियों की कम दाखिला दर को देखते हुए उनकी संख्या बढ़ाने की कवायद शुरू हो गए हैं। संकेत है कि लड़कियों के मामले में जरूरी अंकों के नियम शिथिल किए जा सकते हैं। उच्च शिक्षा सचिव अशोक ठाकुर ने कहा कि लड़कियों की संख्या बढ़ाने के लिए आइआइटी का संयुक्त दाखिला बोर्ड (जैब) जरूरी अंकों के मामलें में उन्हें छूट दे सकता है। विभिन्न आइआइटी में हर साल बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाने के सवाल पर मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा कि सरकार इस पर काम कर रही है। यही वजह है कि 2011 में जहां 700 सीटें खाली रह गई थीं, 2012 में घटकर वह 300 ही रह गईं। इन निर्णयों पर भी आइआइटी काउंसिल की मंजूरी मौजूदा 3000 पीएचडी सीटों को 2020 तक 10 हजार करने का लक्ष्य। 
सरल होंगे पीएचडी में दाखिले के नियम 
इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाने वाले और इंडस्ट्री में कार्यरत लोगों के लिए सभी आइआइटी में पीएचडी कार्यक्रम शुरू होगा। फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए आइआइटी व एनआइटी एक साझा ट्रेनी टीचर अवार्ड शुरू करेंगे। ट्रेनी टीचर अवार्ड योजना के तहत एनआइटी समेत सभी केंद्रीय तकनीकी संस्थानों (एआइसीटीई या यूजीसी से मान्यता प्राप्त संस्थानों) के टॉप 15 स्नातकों को ट्रेनी टीचर बनाने के साथ उन्हें पार्ट टाइम एम.टेक करने और पीएचडी करने का मौका मिलेगा। 
एआइसीटीई और यूजीसी से मान्यता प्राप्त गैर केंद्रीय संस्थानों के भी टॉप 15 प्रतिशत छात्रों को भी यह मौका मिल सकेगा, बशर्ते व गैट अंकों के साथ पात्रता पूरी करते हों। 
अमेरिका व यूरोप की तर्ज पर हर आइआइटी ग्रीन आफिस बनाएगा, जिसमें ग्रीन आडिट, ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़े पाठ्यक्रम आदि पर फोकस किया जाएगा।

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