Monday, 25 June 2012

मंगल पर है जल का भंडार!


अब तक माना जाता रहा है कि ब्रह्मंड में धरती ही एक मात्र ज्ञात ग्रह है, जिसके आंतरिक हिस्से में जल का भंडार है. लेकिन वैज्ञानिकों के एक दल ने मंगल ग्रह से आये उल्का पिंड के परीक्षण के बाद एलान किया है कि मंगल ग्रह के मैंटल (आंतरिक सतह) में जल का बड़ा भंडार है. इसकी मात्रा धरती के गर्भ में मौजूद जल के मात्रा से कहीं ज्यादा है. वैज्ञानिकों का कहना हैकि इस खोज के बाद मंगल ग्रह के भूगार्भिक इतिहास की नये सिरे से व्याख्या करनी होगी. क्योंकि इससे पूर्व के खोजों के आधार पर कहा जाता रहा है मंगल ग्रह का आंतरिक भाग जल विहीन है और बिलकुल सूखा है. इसके अलावा कुछ नये तथ्य भी सामने आये हैं, जिससे कोर में मौजूदा जल को सतह पर लाने में मदद मिलेगी. यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको के वैज्ञानिक फ्रांसिस मैकयूब्बीन का कहना है कि इस शोध के जरिये मंगल पर जल की मौजूदगी का पता चलने से कहा जा सकता है कि वहां जीवन की पूरी संभावना है. उल्कापिंड के काल के बारे में कहा जा रहा हैकि यह 2.5 मिलियन वर्ष पूर्व मंगल से टूटकर धरती पर पहुंचा है. मीटीअराइट जीयोकेमेस्ट्री में ग्रहों से टूटे उल्का पिंडों का अध्ययन किया जाता है. इसमें उल्कापिंड का परीक्षण किया जाता हैऔर उसके निर्माण प्रक्रिया की पड़ताल की जाती है. उसमें मौजूदा तत्वों का भी इसी के जरिये पता लगाया जाता है. परीक्षण के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा हैकि मंगल की उत्पत्ति में जल की महत्वपूर्ण भूमिका रही. बाद में जब लाल ग्रह अपनी पूर्ण अवस्था में आ गया तब जल इसके अंतरिक भाग में संग्रहित हो गया. मंगल के मैंटल में 70 से 300 मिलियन प्रति कण जल है. वहीं धरती के ऊपरी मैंटल में 50-300 पीपीएम जल होते हैं.

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