Wednesday, 6 June 2012

अद्भुत खगोलीय घटना

यह हफ्ता शुक्र के पारगमन के लिए जाना जाएगा। आसमान में यह नजारा मंगलवार को अमेरिकियों ने देखा और आज यूरोप के लोगों ने। वाकई, यह एक अतुलनीय खगोलीय घटना है और इसे देखना एक जादुई अहसास देने वाला है। आठ साल पहले भी यह नजारा दिखा था, जब पृथ्वी व सूर्य के बीच से शुक्र गुजरा था। अब 2117 से पहले यह नजारा नहीं दिखेगा। इस तरह की हरेक खगोलीय घटना एक अवसर है कि चौंका देने वाली खगोलीय गतिविधियों पर विचार-विमर्श हो व इनकी गणना सटीक हो। अब तक पारगमन की छह खगोलीय घटनाएं दर्ज हैं। 1639 में इस तरह की सबसे पहली घटना दर्ज हुई। इसकी भविष्यवाणी इंग्लैंड में टॉक्सटेथ के एक पादरी ने की थी। अगले दो दशकों तक उनके दस्तावेज अप्रकाशित रहे। जेरेमियाह होरोक्स की मृत्यु 22 साल में ही हो गई थी। वह उस दुनिया में जन्मे थे, जिसमें यह भ्रांति थी कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है। अपरिष्कृत दूरबीन, त्रुटियुक्त घड़ी व केपलेर के पूर्व के आकलनों के आधार पर उन्होंने यह भविष्यवाणी की थी। फिर भी उन्होंने सौर तंत्र की पुष्टि की और पारगमन का इस्तेमाल किया। परंतु इसे हूबहू अवलोकित करने की जरूरत होती है। इसके लिए यह जरूरी होता कि पर्यवेक्षक इस प्रक्रिया के दौरान ग्रह को कम से कम दो अलग-अलग जगहों पर देख सके। 1761 में ब्रिटेन, फ्रांस व ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिकों ने होरोक्स के अवलोकन के आधार पर अपनी तैयारियां कीं। हालांकि, यह ‘सेवन ईयर्स वॉर’ का दौर था। इसलिए सुमात्र, पांडिचेरी, सेंट हेलेना, साइबेरिया व हिंद महासागार से अवलोकन न के बराबर ही हो पाया। दूरबीनें बेहतर थीं, पर खगोल घड़ी पर भरोसा करना मुश्किल था। नौसंचालन में भी लापरवाही बरती गई। 1769 तक यूरोप शांत हो गया। 1761 से 1769 तक जो भी डाटा उपलब्ध हुए, उसके आधार पर सूर्य की दूरी का पता लगाया गया और खगोलीय गणनाओं में सटीकता आने लगी। 1874 व 1882 के पारगमन के वक्त फोटोग्राफी के साधन भी थे व वाष्पचालित पोतें भी। 2004 में पारगमन से सीख लेते हुए अन्य खगोलीय पिंडों का भी अध्ययन किया गया।
द गाजिर्यन, ब्रिटेन

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