Sunday, 20 May 2012

उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मांग पर योजना आयोग द्वारा एनआर कृष्णमूर्ति की अध्यक्षता में  उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि छात्रों की संख्या के लिहाज से देश में उच्च शिक्षण संस्थानों की बेहद कमी है। अगर अभी से ध्यान न दिया गया तो एक दशक बाद 2.6 करोड़ छात्र दाखिले को मोहताज होंगे।
निजी क्षेत्र के लिए उच्च शिक्षा के दस शहरों में नए पड़ाव बनाने एवं 6 शहरों में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना की सिफारिश भी की है। मानव संसाधन विकास मंत्री ने रिपोर्ट पर विचार करने के लिए तीन माह का समय मांगा है। समिति ने कहा है कि उच्च शिक्षा के लिए योग्य छात्रों की कमी नहीं है मगर उन्हें दाखिला ही नहीं मिल पाता क्योंकि देश में शिक्षण संस्थान ही नहीं हैं। उन्होंने सरकार को आगाह किया है कि यदि यही हाल रहा तो दस वर्ष बाद 2.6 करोड़ छात्र अपने दाखिले के लिए तरस रहे होंगे। सरकार के सीमित संसाधनों और छात्रों की बढ़ती संख्या के बिगड़ते संतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए समिति ने कहा है कि सरकार को चाहिए कि इस मांग को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र का आह्वान करे। समिति ने निजी क्षेत्र को प्रलोभन देने के लिए कुछ आकर्षक नीतियां बनाने की भी सिफारिश की है। कृष्णामूर्ति समिति ने शिक्षा के नए पड़ाव के लिए 10 शहरों की पहचान कर उनमें निजी क्षेत्र को आमंत्रित करने की सिफारिश की है।

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