Thursday, 17 May 2012

क्या युवा पीढ़ी को मिल पाएगा उनके सपने का आकाश

शशांक द्विवेदी  
27 Feb 2012,नवभारत टाइम्स  
 पिछले साल देश में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा लॉन्च दुनिया के सबसे सस्ते टैबलेट (कंप्यूटर) आकाश के लिए इंतजार अब और बढ़ गया है। इस इंतजार में बेकरारी के साथ-साथ उत्तेजना भी है। वास्तव में यह एक तकनीकी क्रांति के सफल या असफल होने के पहले की उत्तेजना है, क्योंकि इससे देश के गांवों और कस्बों का भी सपना जुड़ा है। सिर्फ युवा छात्र ही नहीं, हर आम और खास में इसे पाने और देखने की ललक है। दुनिया के इस सबसे सस्ते टैबलेट की इस समय देश में जबर्दस्त मांग है। इसके लिए अब तक सात सौ करोड़ रुपये के ऑर्डर आ चुके हैं। लेकिन हाल की कुछ घटनाओं के कारण इसे लेकर कुछ सवाल भी उठने लगे है। पता नहीं, इस सस्ते टैबलेट के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति लाने का सपना देखा गया था, वह पूरा होगा या नहीं।

अगर इससे होने वाले बिजनेस और ब्रिटेन की डेटाविंड कंपनी से हुए विवाद वाला पक्ष छोड़ दें तो आकाश टैबलेट में सबसे बड़ी शिकायत इसकी कम बैटरी लाइफ और स्लो प्रोसेसर की है। सामान्य टैबलेट में बैटरी लाइफ आठ घंटे की होती है लेकिन यह दो-तीन घंटे ही चलता है। असल में यह स्टैंडर्ड टैबलेट का बिल्कुल सस्ता संस्करण है। सस्ता इसलिए है कि इसमें काफी कम कन्फीगरेशन है, सात इंच का स्क्रीन है और माइक्रोप्रोसेसर काफी धीमा है। इसमें लगाया गया एंड्रॉयड सिस्टम पुराना पड़ चुका है। अब इससे आगे के एंड्रायड सिस्टम आ चुके है। इसका टचस्क्रीन भी रेजिस्टिव है।

हमारे देश के गांवों में बिजली की भारी समस्या है। इसलिए आकाश की छोटी बैटरी लाइफ इसके इस्तेमाल में बड़ी बाधा बन सकती है। इसके अलावा हर छात्र-छात्रा को इसके इस्तेमाल करने के लिए हर बेंच में सॉकेट की जरूरत पड़ेगी। इस तरह की कोई तैयारी हमारे क्लास रूम में नहीं है। लेकिन तमाम ऐसी कमजोरी के बाद भी आकाश को एक अच्छा गैजेट माना जा सकता है। आगे इसमें और इनोवेशन की गुंजाइश बनी रहेगी। यह उपयोगी उपकरण हो सकता है, खासकर ई-बुक रीडिंग जैसी इंटरनेट रहित एप्लीकेशन के लिए। आने वाले दिनों में आइपैड का कांसेप्ट हमारे आदतों को बदल सकता है। मसलन कागज के अखबार पढ़ने की जगह लोग इस पर ही देश-दुनिया की खबरें पढ़ा करेंगे। देश में डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में आकाश से काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं और इससे एजुकेशन सेक्टर में क्रांति आ सकती है । यह महंगे आईपैड का मुकाबला तो नहीं कर सकता लेकिन डिजिटल क्रांति से महरूम लोगों खास कर युवा पीढ़ी के लिए अहम साबित हो सकता है।

वास्तव में आकाश टैबलेट लाने का मुख्य मकसद कंप्यूटिंग और इंटरनेट एक्सेस के लिए प्राइस बैरियर को तोड़ना ही है। इतने कम दाम में इतने सारे फीचर्स एक टैबलेट में समाहित करना कोई आसान काम नहीं है। अगर इस परियोजना के संचालक देश भर से आने वाली विशाल मांग को पूरा कर पाते हैं और यह परियोजना जमीनी स्तर पर सही ढंग से लागू की जाती है तो आने वाले वर्षों में कंप्यूटर शिक्षा और साक्षरता दोनों ही मोर्चों पर बड़ी उपलब्धियां अर्जित की जा सकेंगी।

पिछले दिनों आकाश टैबलेट की गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही शिकायतों के बीच सरकार ने अप्रैल में इसका अपग्रेडेड वर्जन आकाश -2 बाजार में लाने का ऐलान किया है। लेकिन यह इस देश का दुर्भाग्य है कि सरकार लोगों को सपने तो दिखाती है , लेकिन उनको पूरा करने की दिशा में ठीक ढंग से काम नहीं होता। आकाश परियोजना के शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इस तरह के तमाम सवाल सामने आने लगे थे , लेकिन सरकार ने उस समय इन बातों को अनसुना कर दिया। अगर उसी समय आकाश की कमियों को अपग्रेड कर दिया गया होता तो आज नए आकाश - 2 को लांच करने की नौबत नही आती। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए आपूर्ति के साथ - साथ इसकी गुणवत्ता बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन आने वाला वक्त बताएगा कि सरकार इन चुनौतियों का सामना ठीक ढंग से करती है या अन्य परियोजनाओं की तरह इसे भी सिर्फ निजी कंपनियों के भरोसे छोड़ देती है। 
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/12044392.cms

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