Wednesday, 23 May 2012

डिजिटल युग में बिगड़ रहे बच्चे





भारत में इंटरनेट का उपयोग करने वाले बच्चों के बीच एक नई समस्या साइबरबेटिंग की है। ये बच्चे स्कूल में अपने शिक्षकों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं या उन्हें चिढ़ाते हैं और फिर उनकी प्रतिक्रिया को मोबाइल फोन के जरिए रिकॉर्ड कर ऑनलाइन करते हैं।
ऑनलाइन सुरक्षा प्रदान करने वाली कंपनी नार्टन के ऑनलाइन फैमिली के ताजा सर्वेक्षण से यह खुलासा हुआ है। सर्वेक्षण में शामिल ५० प्रतिशत शिक्षक इसके शिकार हुए हैं या उन्होंने किसी और शिक्षक के साथ ऐसी घटना होने की बात सुनी है। कंपनी ने भारत में ५०० माता-पिता, १०० शिक्षकों और छः से १७ उम्र वाले २०० बच्चों से इस विषय पर प्रश्न पूछे थे। सर्वेक्षण में शामिल ७९ प्रश बच्चों ने कहा कि इंटरनेट पर उनका अनुभव बहुत बार नकारात्मक रहा है। दस में से छः बच्चों का कहना था कि इंटरनेट पर उन्हें अजनबियों ने गंदी तस्वीरें भेजीं, किसी ने उन्हें चिढ़ाया या वे साइबर क्राइम के शिकार हुए।
ऑनलाइन हुई इन घटनाओं का वास्तविक जीवन में भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इंटरनेट पर दी गई व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग होना, किसी विज्ञापन के चक्कर में धन गँवाना बालमन पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपना खाता खोलने वाले ८४ प्रश बच्चों का कहना था कि उनके साथ अक्सर ऐसी अनचाही घटनाएँ होती रहती हैं जबकि सोशल नेटवर्किंग साइट पर सक्रिय न रहने वाले बच्चों में से ५८ फीसद इसके शिकार होते हैं। नार्टन ने न सिर्फ भारत में बल्कि कुल २४ देशों में ऐसा सर्वेक्षण किया जिसमें सबकी रिपोर्ट नकारात्मक ही आई है। ३९ प्रतिशत भारतीय अभिभावकों ने इंटरनेट का उपयोग करने वाले अपने बच्चों के लिए नियम बनाए हैं। नियम मानने वाले ७५ प्रतिशत बच्चे इन अनचाही घटनाओं के शिकार होते हैं, लेकिन नियम तोड़ने वाले बच्चों के बीच यह आँकड़ा ९१ प्रतिशत का है।

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