Tuesday, 6 April 2021

न्यूटन पर पुस्तकें

सुशोभित

आइज़ैक न्यूटन के व्यक्तित्व, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और, वैश्विक ज्ञान-परम्परा में उसके योगदान के प्रति मेरी रुचि जब कौतूहल की सीमा को लांघकर सम्यक-मननशीलता के लोक में प्रवेश कर गई, तब मैंने निर्णय लिया कि मुझको न्यूटन पर पुस्तकों का अध्ययन करना होगा, यत्र-तत्र प्रस्तुत फ़ौरी सामग्रियों को खंगालने से अब बात नहीं बनेगी। किंतु वही यक्षप्रश्न एक बार पुन: प्रस्तुत हुआ, जो कि किसी भी विषय पर गम्भीर गवेषणा करने वाले हर व्यक्ति के सम्मुख प्रस्तुत होता है- कौन-सी पुस्तकें? संसार में हर महत्वपूर्ण व्यक्ति, विचार और परिघटना पर बीसियों किताबें लिखी गई हैं, इनमें से क्रिटिकल टेक्स्ट्स को खोजकर उन्हीं पर स्वयम् को एकाग्र करना सरल नहीं है।

मैंने पाया कि न्यूटन पर बात करने वाले लगभग सबों ने एक स्वर से रिचर्ड एस. वेस्टफ़ॉल की किताब 'नेवर एट रेस्ट' को उस पर लिखी सर्वश्रेष्ठ पुस्तक और अधिकृत जीवनी स्वीकारा है। यह पुस्तक सबसे पहले वर्ष 1980 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से छपी थी। अकादमिक दृष्टि से इसका हार्डबाउंड निकाला गया था, लेकिन दो साल में दो बार री-प्रिंट होने के बाद इसका पेपरबैक निकालने का निर्णय लिया गया। यह किताब न्यूटन के अध्येताओं में इतनी लोकप्रिय सिद्ध हुई कि वर्ष 2010 तक इस पेपरबैक संस्करण के भी 20 री-प्रिंट निकल चुके थे। न्यूटन पर किसी भी तरह का अध्ययन करने की मंशा रखने वाला व्यक्ति इस पुस्तक की उपेक्षा कर आगे नहीं बढ़ सकता। यह कोई 900 पन्नों का सुदीर्घ ग्रंथ है, किंतु भारत में सहज उपलब्ध नहीं। 

जब न्यूटन के बारे में मेरी जिज्ञासा आरम्भिक कौतूहल के दौर में थी, तब मैंने उस पर अपेक्षाकृत एक छोटी जीवनी पढ़ने का निर्णय लिया था। भारत में वैसी दो जीवनियाँ सुलभ थीं- एक के लेखक जेम्स ग्लीइक थे और दूसरी के पीटर एक्रॉयड। एक्रॉयड ने अपनी पुस्तक ब्रीफ़ लाइव्ज़ सीरिज़ के तहत लिखी थी। यह कोई 154 पन्नों की बहुत ही मुख़्तसर किताब है। मैं इसे पढ़ गया, किंतु संतोष नहीं हुआ। तब निर्णय लिया कि मुझको न्यूटन पर एक कोई अधिक कॉम्प्रेहेन्सिव और एग्ज़ॉस्टिव टेक्स्ट पढ़ना होगा। मेरे निश्चय की सुई 'नेवर एट रेस्ट' के इर्द-गिर्द ही घूमती रही थी।

एक चर्चित न्यूटन-स्कॉलर हैं- विलियम आर. न्यूमैन। दो साल पहले प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी प्रेस से उनकी किताब 'न्यूटन द अल्केमिस्ट' आई थी और कीमियागरी की ख़ुफ़िया दुनिया में न्यूटन की संगीन दिलचस्पी के ब्योरों की पड़ताल उन्होंने कुछ नए अध्ययनों की रौशनी में की थी। सनद रहे, न्यूटन-पेपर्स को आज न्यूटन की मृत्यु के तीन सौ वर्षों बाद भी खंगाला जा रहा है और नित्य-नई सूचनाएँ वहाँ से बरामद होती हैं (इस विषय पर भी एक पुस्तक है- 'द न्यूटन पेपर्स', लेखिका सारा ड्राय )। विलियम आर. न्यूमैन से इधर किसी ने पूछा कि अगर न्यूटन पर पाँच ही किताबें पढ़ी जानी चाहिए तो वो कौन-सी होंगी? इस जिज्ञासा ने मेरा ध्यान खींचा, क्योंकि यह मेरा भी प्रश्न था। मेरे इर्द-गिर्द वैसे कोई न्यूटन-स्कॉलर्स नहीं थे, जिनसे मैं मशविरा ले पाता और इसके लिए मुझे विलियम आर. न्यूमैन जैसे किसी मुखर विद्वत के परामर्शों की ही आवश्यकता थी। 

न्यूमैन ने जो किताबें बतलाईं, उनमें सबसे पहली किताब एक बार फिर रिचर्ड एस. वेस्टफ़ॉल की 'नेवर एट रेस्ट' ही थी। उन्होंने चार और किताबों के नाम लिए, जिनमें रॉब इलीफ़ की 'प्रीस्ट ऑफ़ नेचर', बुख़वाल्ड और फ़ीनगोल्ड की 'न्यूटन एंड द ओरिजिन ऑफ़ सिविलाइज़ेशन', निकोलो गुइच्चीकार्डिनी की 'आइज़ैक न्यूटन एंड नेचरल फ़िलॉस्फ़ी' और फ्रान्क ई. मान्युएल की 'अ पोर्ट्रेट ऑफ़ आइज़ैक न्यूटन' सम्मिलित है। इलीफ़, बुख़वाल्ड और फ़ीनगोल्ड की किताबें न्यूटन की थियोलॉजिकल धारणाओं पर एकाग्र हैं। गुइच्चीकार्डिनी की किताब नेचरल फ़िलॉस्फ़ी के इतिहास में न्यूटन को अवलोकती है, वहीं फ्रान्क ई. मान्युएल की किताब फ्रायडियन साइकोएनालिसिस की दृष्टि से न्यूटन पर बात करती है। वहीं, दोहराने की ज़रूरत नहीं, वेस्टफ़ॉल की किताब न्यूटन पर एक प्रॉपर और डेफ़िनेटिव बायोग्राफ़ी है। 

सौभाग्य से मैं वेस्टफ़ॉल की वह सेलेब्रेटेड किताब ('नेवर एट रेस्ट') प्राप्त करने में सफल रहा हूँ। गुइच्चीकार्डिनी और मान्युएल को छोड़कर शेष की पुस्तकें भी पा सका हूँ। न्यूमैन ने जॉन मेनार्ड कीन्स की न्यूटन-स्पीच को भी बहुत महत्व दिया था, जिसे एक बार में पढ़ गया हूँ। 'नेवर एट रेस्ट' का अध्ययन मैं आरम्भ कर चुका हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करूँगा कि 900 पन्नों के इस ग्रंथ को पढ़ जाने का धैर्य और संकल्प मुझको दे, और इस उद्यम के बीच में कोई व्यवधान नहीं आए। फ़िलवक़्त यह सब स्वान्त:सुखाय ही है, किंतु अगर इस उपक्रम में न्यूटन के बारे में मुझे कुछ वैसी मालूमात हाथ लगती हैं, जिनका एक वृहत्तर मानवीय परिप्रेक्ष्य हो (जैसे, न्यूटन का एकान्त) और जो सामान्य पाठकों के लिए रुचिकर हो तो उस पर लिखने से चूकूँगा नहीं। सत्रहवीं सदी के यूरोपियन-ज्ञानोदय में निजी रूप से मेरी दिलचस्पी है, और रेनेसां के केंद्रीय व्यक्तित्व- सर आइज़ैक न्यूटन- की सुदीर्घ-जीवनी पढ़ जाने का अर्थ उस ज्ञानोदय के अनेक महत्तम परिप्रेक्ष्यों को उलीच आना भी है।

पाठकों से यह सूचनाएँ इसलिए साझा कर रहा हूँ कि अगर उनमें से किसी की भी रुचियों के वृत्त में यह भावलोक आता है तो उन्हें क्रिटिकल टेक्स्ट्स की खोज में वैसा परिश्रम करने की आवश्यकता नहीं, जैसा मैंने किया है। इस पोस्ट को वे इस विषय पर एक अधिकृत टिप्पणी मानें। यहाँ उल्लेखित शीर्षक न्यूटन पर लिखी श्रेष्ठ पुस्तकों के हैं, और आपमें से किसी की रुचि हो तो उस दिशा में अपनी यात्रा आरम्भ सकता है, जैसा इन पंक्तियों के लेखक ने किया है। अभी इतना ही।



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