Wednesday, 23 September 2015

खुलेंगे ब्रह्मांड के रहस्य

अत्याधुनिक इंफ्रारेड कैमरा एनआइआरकैम 
यह एक विशाल इंफ्रारेड टेलीस्कोप है। आने वाले दशक में अंतरिक्ष के पर्यवेक्षण का मुख्य कार्य इसी दूरबीन द्वारा किया जाएगा
आने वाले दशकों में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए नई टेक्नोलॉजी और शक्तिशाली उपकरणों के उपलब्ध होने के बाद हमें ब्रह्मांड से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल जाएंगे। अमेरिका की एरिजोना यूनिवर्सिटी और लॉकहीड मार्टिन कंपनी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया जा रहा नियर इंफ्रारेड कैमरा या एनआइआरकैम एक ऐसा महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका पूरी दुनिया के खगोल वैज्ञानिक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें यकीन है इस अति संवेदनशील उपकरण से ब्रह्मांड के अनसुलङो रहस्यों को समझने में मदद मिलेगी। एनआइआरकैम को अक्टूबर, 2018 में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के साथ फ्रेंच गुयाना से छोड़ा जाएगा। टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में ले जाने का काम यूरोपियन स्पेस एजेंसी का शक्तिशाली एरियन 5 रॉकेट करेगा। इस कैमरे के कोरोनाग्राफ उपकरणों के जरिये खगोल वैज्ञानिक सुदूर अंतरिक्ष में झांक सकेंगे और चमकीली वस्तु या तारे आसपास मौजूद अत्यंत धुंधली वस्तुओं अथवा ग्रहों की तस्वीर खींच सकेंगे। इस कैमरे से प्रारंभिक तारों और निर्माणाधीन आकाशगंगाओं के विस्तृत चित्र तैयार करना संभव हो जाएगा। जिस तरह हम सूरज की रोशनी में किसी वस्तु को देखने के लिए अपनी आंखों के ऊपर अपना हाथ रख लेते हैं, एनआइआरकैम का कोरोनाग्राफ भी उसी तरह से काम करता है। कोरोनाग्राफ चमकीली वस्तु से निकलने वाली तेज रोशनी को अवरुद्ध कर देता है जिसकी वजह से धुंधली वस्तुओं को देखना मुमकिन हो जाता है।
इस कैमरे के विशेष फिल्टरों से हमें तारों के उदय काल में मौजूद रासायनिक संरचनाओं और गैसों के उभरते हुए बादलों को समझने में मदद मिलेगी। इस कैमरे के फिल्टर प्रकाश की अलग अलग वेवलेंथ को पकड़ सकते हैं। चमक में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाकर यह कैमरा आकाश गंगाओं के बीच दूरियों का अंदाजा कर सकता है। यह कैमरा दूसरे तारों के इर्दगिर्द घूमने वाले ग्रहों के भौतिक और रासायनिक गुणों का पता लगाने में भी समर्थ होगा। एनआइआरकैम ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने में सहायक हो सकता है। इस कैमरे के हार्डवेयर में 4 करोड़ पिक्सल हैं और यह 35 केल्विन या माइनस 238 डिग्री सेल्सियस के अत्यंत ठंडे तापमान पर काम करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एनआइआरकैम से हम डार्क मैटर और डार्क एनर्जी को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। हम जानते हैं कि इनका अस्तित्व है, लेकिन हमारी दूरबीनें अभी तक इनका पता नहीं लगा पाई हैं। यह कैमरा हमें यह भी समझाएगा कि अंतरिक्ष और समय मूलभूत स्तर पर किस तरह कार्य करते हैं। एनआइआरकैम द्वारा एकत्र डेटा का पूरी दुनिया पर गहरा असर पड़ेगा। ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़ी बातों को समझ कर खगोल वैज्ञानिक उन तमाम ब्रह्मांडीय प्रक्रियाओं को ठीक से समझ पाएंगे जो फिलहाल हमारी समझ से बाहर हैं। एनआइआरकैम की खूबियों पर चर्चा करते हुए यहां मुख्य दूरबीन, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का उल्लेख करना भी उचित होगा। यह एक विशाल इंफ्रारेड टेलीस्कोप है। आने वाले दशक में अंतरिक्ष के पर्यवेक्षण का मुख्य कार्य इसी दूरबीन द्वारा किया जाएगा।

यह दूरबीन हमारे ब्रह्मांड के इतिहास के प्रत्येक चरण का अध्ययन करेगी जिसमें बिग बैंग या ब्रह्मांडीय महाविस्फोट के बाद निकली पहली चमक, पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन में मददगार सौरमंडलों का निर्माण शामिल है। वैज्ञानिकों को इस दूरबीन की तैनाती का इंतजार है। शुरू में इस दूरबीन का नाम नेक्स्ट जनरेशन स्पेस टेलीस्कोप रखा गया था। 2002 में नासा के पूर्व प्रशासक जेम्स वेब पर इसका नया नाम रख दिया गया। नासा का गोडार्ड स्पेस स्पेस सेंटर इसका प्रबंधकीय कार्य देख रहा है। अंतरिक्ष में तैनाती के बाद अमेरिका का स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट वेब टेलीस्कोप का संचालन करेगा।

1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन रामधारी सिंह 'दिनकर' और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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