Friday, 21 August 2015

शक्तिशाली क्रायोजनिक इंजन का सफल परीक्षण

अंतरिक्ष में बढ़ेगी इसरो की ताकत
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने उच्च शक्ति के एक और स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन बनाने में सफलता हासिल की है। इस इंजन को रॉकेट में फिट करने से पहले  इसरो की प्रयोगशाला में जमीनी परीक्षण किया गया जो सफल रहा। इस इंजन को भारी उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 में इस्तेमाल किया जाएगा।
इसरो के अनुसार  चेन्नई से 680 किलोमीटर दूर महेंद्रगिरी स्थित इसरो परिसर में इस इंजन का परीक्षण किया गया। 19 टन की उच्च शक्ति के इस इंजन का यह पहला परीक्षण था जो सफल रहा। इससे पहले इसरो ने जो स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन बनाया था उसकी क्षमता 12.5 टन की थी। जिसे जीएसएलवी मार्क-2 में इस्तेमाल किया जा चुका है। 5 जनवरी 2014 को जीएसएलवी मार्क-2 प्रक्षेपित किया गया था।
इसरो के अनुसार 800 सेकेंड तक इंजन के सफल परीक्षण किए गए। रॉकेट के प्रक्षेपण के दौरान इंजन जितनी देर चलता है, यह अवधि उससे 25 फीसदी ज्यादा है। इसलिए इसे इसरो अब सफल मान रहा है। हालांकि कुछ और तकनीकी परीक्षण अभी किए जाएंगे।

इस इंजन के जीएसएलवी मार्क-3 में इस्तेमा से भारत भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण में सफल हो जाएगा। यह इंजन चार हजार टन तक की क्षमता के उपग्रहों को भू स्थैतिक कक्षा में ले जाने में सफल होगा। चार हजार किग्रा के बड़े उपग्रहों के प्रक्षेपण से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम न सिर्फ दुनिया के बड़े कार्यक्रमों में शुमार होगा बल्कि इससे राजस्व अर्जित भी करेगा। क्योंकि कई देश भारत से अपने भारी उपग्रह प्रक्षेपित कराने के लिए आएंगे। इंजन का निर्माण इसरो की केरल स्थित लिपिड प्रपल्स सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) ने किया है।

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