Sunday, 5 August 2012

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग पर 'जितेंद्रÓ शब्द बिल्कुल सटीक बैठता है। क्योंकि जो मोटर न्यूरॉन डिजीज से पीडि़त होकर भी न्यूटन और आइंस्टीन की बिरादरी में शामिल हो गए हों, उनके लिए इससेमाकूल शब्द कोई हो ही नहीं सकता! कौन हैं स्टीफन हॉकिंग और विज्ञान के क्षेत्र में क्या है उनका योगदान?

आज समाज में ऐसे कम ही लोग मिलते हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय पाई हो। असल में जो लोग इस कारनामे को कर-गुजरते हैं, वे ही सही मायने में 'जितेंद्रÓ कहलाते हैं। स्टीफन हॉकिंग भी ऐसे 'जितेंद्रÓ हैं, जिन्होंने इंद्रियों को प्रयत्न करके अपने वश में नहीं किया है, बल्कि उनकी इंद्रियां खुद-ब-खुद उनका साथ छोड़ चुकी है। दरअसल, वे एक न ठीक होने वाली बीमारी यानी मोटर न्यूरॉन डिजीज से पीडि़त हैं। यह एक ऐसी बीमारी, जिसमें मरीज धीरे-धीरे शरीर के किसी भी अंग पर अपना नियंत्रण खो देता है। दरअसल, चिकित्सकों को जब इस बीमारी का पता चला, तो उन्होंने यहां तक कह डाला था कि अब स्टीफन हॉकिंग ज्यादा दिनों तक नहीं जिंदा रह सकेंगे।

गौरतलब है कि बेहद कम उम्र यानी 20 वर्ष की अवस्था में ही वे इस बीमारी के शिकार हो चुके थे। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न केवल अपनी सामान्य जिंदगी को पूरे उत्साह से जीया, बल्कि साइंस के क्षेत्र में अपने 'हैरतअंगेजÓ योगदानों से भी दुनिया को यह दिखा दिया कि वे एक'जितेंद्रÓ हैं।

कहलाते थे आइंस्टीन
स्टीफन के अंदर एक ग्रेट साइंटिस्ट की क्वालिटी बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। दरअसल, किसी भी चीज के निर्माण और उसकी कार्य-प्रणाली को लेकर उनके अंदर तीव्र जिज्ञासा रहती थी। यही वजह थी कि जब वे स्कूल में थे, तो उनके सभी सहपाठी और टीचर उन्हें प्यार से 'आइंस्टीनÓ कहकर बुलाते थे।

और बन गए साइंटिस्ट|
हां, उनकी रुचि मैथमेटिक्स में थी, लेकिन पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। चूंकि उनके पिता खुद एक डॉक्टर थे और इसीलिए वे ऐसा चाहते थे। पर संयोगवश उनकी आगे की पढ़ाई फिजिक्स विषय को हुई और धीरे-धीरे इसी विषय के कॉस्मोलॉजी सेक्शन में

गजब की जीवटता
हॉकिंग को जब यह पता चला कि वे मोटर न्यूरॉन डिजीज से पीडि़त हैं, तो उन्हें दुख जरूर हुआ, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। दरअसल, उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा था कि वे शेष जीवन को कैसे और किस मकसद के साथ जीएं! ऐसे में उन्हें एक ही बात सूझी और वह कि चाहे कितनी भी बुरी परिस्थिति आए, उसे पूरी जिंदादिली के साथ जीओ।

यही कारण है कि उन्होंने न केवल जेने वाइल्ड नामक अपनी प्रेमिका से शादी की, बल्कि अपनी पढ़ाई को भी आगे जारी रखा। हालांकि, यह सब करना आसानी से संभव नहीं था। क्योंकि उनके अंगों ने उनका साथ छोड़ दिया था और धीरे-धीरे उनकी जुबान भी बंद हो गई। अब वे न चल-फिर सकते थे और न ही अपनी बात को बोलकर किसी से शेयर ही कर सकते थे! अंतत: वह समय भी आया, जब डॉक्टरों ने व्हील-चेयर के सहारे शेष जीवन गुजारने की सलाह दे दी।

हालांकि यह कोई सामान्य व्हीलचेयर नहीं है, बल्कि इसमें वे सारे इक्विपमेंट्ïस लगे हुए हैं, जिनके माध्यम से वे विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों के बारे में दुनिया को बता सकते हैं। उल्लेखनीय है कि उनके योगदानों के कारण उन्हें अब तक लगभग बारह सम्मानित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा, वे रॉयल सोसायटी और यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के एक सम्मानित मेंबर भी हैं।

संक्षिप्त परिचय
स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी, 1942 को ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में हुआ था। गौरतलब है कि यही वह तारीख थी, जिस दिन महान वैज्ञानिक गैलिलियो का भी जन्म हुआ था। चूंकि वे एक मेधावी छात्र थे, इसलिए स्कूल और कॉलेज में हमेशा अव्वल आते रहे। मैथमेटिक्स को प्रिय विषय मानने वाले स्टीफन हॉकिंग में बड़े होकर अंतरिक्ष-विज्ञान में एक खास रुचि जगी। यही वजह था कि जब वे महज 20 वर्ष के थे, कैंब्रिज कॉस्मोलॉजी विषय में रिसर्च के लिए चुन लिए गए। इसके बाद इसी विषय में उन्होंने पीएचडी भी की।

दरअसल, जिस क्षेत्र में योगदान के लिए उनको याद किया जाता है, वह कॉस्मोलॉजी ही है। कॉस्मोलॉजी, जिसके अंतर्गत ब्रह्मïांड की उत्पत्ति, संरचना और स्पेस-टाइम रिलेशनशिप के बारे में अध्ययन किया जाता है। और इसीलिए उन्हें कॉस्मोलॉजी का विशेषज्ञ माना जाता है, जिसकी बदौलत वे थ्योरी ऑफ 'बिग-बैंगÓ और 'ब्लैक होल्सÓ की नई परिभाषा गढ़ पाने में कामयाब हो सके हैं।
(ref-career7india)

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