Saturday, 7 July 2012

नये उत्प्रेरक से बढे.गी गुणवत्ता

मिनेसोटा विश्‍वविद्यालय के शोधार्थियों ने एक ऐसे उत्प्रेरक का विकास किया है, जिसकी गैसोलीन, प्लास्टिक, बायोफ्यूल, फॉर्मास्यूटिकल और अन्य रसायानिक पदाथरें के उत्पादन के दौरान संपत्र की जाने वाली रासायनिक क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. इसके प्रयोग से इन रासायनिक क्रियाओं को तेजी से संपत्र किया जा सकता है. इसकी मदद से अरबों डॉलर के केमिकल उद्योग को क्षमतावान बनाया जा सकता है, साथ ही उसके उत्पादन लागत में भी कमी लायी जा सकती है. यह शोध साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. केमिकल इंजीनियरिंग और मटीरीयल साइंस के प्रोफेसर माइकल सपत्सिस के अनुसार इस खोज का बहुत व्यापक प्रभाव होगा. गैसोलीन के संशोधन के दौरान उत्प्रेरक का बहुतायत में प्रयोग किया जाता है. अब तक इसके लिए परंपरागत उत्प्रेरक को प्रयोग में लाया जाता रहा है. लेकिन, इस नये उत्प्रेरक के प्रयोग से संशोधन की क्रिया तेजी से पूरी की जा सकेगी. इसके साथ ही अन्य कई रासायनिक क्रियाओं को पूरा कराने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इस उत्प्रेरक के इस्तेमाल से गैसोलीन सशोधन और अन्य रसायनिक पदाथरें के उत्पादन लगात में कमी लायी जा सकती है. अल्ट्रा-थिन जिलेट नैनोशीट से बने उत्प्रेरक को 90 डिग्री कोण पर इस तरह मोड़ा गया है, जैसे की गत्ते का चौखटा घर बना हो. इस तरह का आकार देने से उत्प्रेरक की क्षमता बढ.ी है. परंपरागत उत्प्रेरक की तुलना में इस उत्प्रेरक की कीमत भी कम होगी. किसी रसायनिक क्रिया में उत्प्रेरक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. रसायनिक क्रियाओं को संपत्र कराने में इसकी जरूरत होती है.

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