Wednesday, 23 May 2012

क्या है बायोमेट्रिक सिस्टम ?

बायोमेट्रिक दो शब्दों से मिलकर बना है, बायोस और मेट्रोन. बायोस का मतलब होता है जीवन संबधित. मेट्रोन का अर्थ है माप करना. इस तरह कहा जा सकता है कि बायोमेट्रिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें हम किसी व्यक्ति विशेष के जीवन से संबधित आंकड़ों का अध्ययन किया जाता है. इस तकनीक की मदद से व्यक्ति के अंगूठे के निशान और अंगुलियों और आवाज एवं आंखों की पुतलियों के आधार पर उसकी पहचान करता है.
बायोमेट्रिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक गतिविधियों के आधार कार्य काम करता है. मनोविज्ञान में व्यक्ति के शरीर के अंगों की बनावट को ध्यान में रखा जाता है. व्यावहारिक में उस व्यक्ति के व्यवहार को आधार माना जाता है. उदाहरण के तौर पर, व्यक्ति की आवाज और उसके हस्ताक्षर. बायोमेट्रिक तकनीक के बढ़ते उपयोग की सबसे बड़ी वजह आज के समय में व्यक्ति विशेष की पहचान से संबधित हो रहे अपराधों को रोकना है.
जैसे कि किसी भी व्यक्ति की पहचान कार्ड को चुराकर उसका गलत उपयोग करना. उसकी संपत्ति पर अधिकार कर लेना और नकली पहचान पत्र बनवाना. भारत में कई जगहों एवं क्षेत्र में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तकनीक के जरिये एटीएम मशीन से ट्रांजक्शन को भी सुरक्षित बनाया जा सकता है.
जापान में एटीएम मशीन हाथों की नसों के इंप्रेशन से खुलती है. जर्मनी, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया में बायोमेट्रिक तकनीक का खूब उपयोग होता है. हर व्यक्ति में पाये जाने वाली बायोमेट्रिक पहचान अलग होती है.इस कारण कोई हेर-फ़ेर या बदलाव करना बहुत मुश्किल है. इस तकनीक में पहले डाटा को एनक्रिप्ट किया जाता है, ताकि कोई उसका क्लोन ( नकल ) न बनाया जा सके.
भारत में भी लोगों का पहचान पत्र बनाने के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यूआइडी ( यूनिक आइडेंटिफ़िकेशन यानी विशेष पहचान पत्र ) या आधार नाम से एक परियोजना इसीलिए चलायी जा रही है.

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