Wednesday, 13 March 2019

न्यूटन के तीसरे नियम के संशोधन पर इंटरव्यू

*न्यूटन के तीसरे नियम के संशोधन पर अजय शर्मा जी का  इंटरव्यू*

*प्र.1*: न्यूटन की गति का तीसरा नियम क्या है? इसे कैसे समझा जा सकता है?
*अजय शर्माः* न्यूटन ने तीसरा नियम अपनी पुस्तक प्रिसीपिया मे 1686 में दिया था इसके अनुसार क्रिया (Action ) प्रतिक्रिया (Reaction)  हमेशा बराबर और विपरीत होते हैं। जो नियम मैंने सुझाया हे उसके अनुसार क्रिया प्रतिक्रिया के बराबर, कम या ज्यादा भी हो सकती है।

*प्र.2:* इस संबंध में आपने कौन से नये प्रयोग सुझाये है
*अजय शर्माः* मान लो एक 100 ग्राम भार की विशेष रबड़ की गेंद 1 मीटर ऊंचाई से फर्श पर गिरती है यह फर्श से टकराकर 1 मीटर ऊंचाई तक ऊपर उछलती है मान लो हम इस गेंद के आकार को बदल देते है और यह गोल से अर्धगोलाकार, त्रिभुज या शंकु के आकार की बना देते है है। वास्तव में आकार के बदलाव की वजह से अब 100 ग्राम की वस्तु 1 मीटर तक नही उछलती है। न्यूटन के नियम के अनुसार हर वस्तु को 1 मीटर की ऊंचाई तक उछलना चाहिए। अलग अलग संरचना ( लकड़ी, रबड़ ) और आकार के वस्तुएं भी ली जा सकती हैं।

*प्र.3:* क्या न्यूटन ने वस्तु के आकार के बारे में कुछ नही कहा?
*अजय शर्माः* बिल्कुल नहीं। न्यूटन का नियम सिर्फ भार (क्रिया) के बारे में ही कहता हैं आकार के बारे में कुछ नहीं। इस तरह न्यूटन के अनुसार आकार और कम्पोजिशन  पूरी तरह बेमानी है। संवेदनशील प्रयोगों से नियम की खामी जग जाहिर हो जाएगी।
*प्र.4:* आपने इसकी व्याख्या कैसे की है?
*अजय शर्माः* मैंने न्यूटन के नियम को बदला है। संशोधित नियम में एक नया घटक या फैटर आ जाता हे जो वस्तु आकार और सरंचना की व्याख्या करता है।

*प्र०5:* क्या वैज्ञानिक जगत आपसे सहमत
*अजय शर्माः* हां अमेरिकन एसोसिएशन आफ फिजिक्स टीचर्ज के प्रेजीडैंट प्रोफेसर गारडन रामसे ने 22 अगस्त, 2018 को लिखित रिपोर्ट में कहा है कि अजय शर्मा के प्रयोगों से न्यूटन का तीसरा नियम गलत सिद्ध हो सकता है। 105वीं वी इंडियन सांइस कांग्रेस ने भी अपनी प्रोसीडिग्ज (फिजिकल साइसिज) में मेरा शोध पत्र प्रकाशित किया  है।
(i) अमेरिकन एसोसियेसन आफ फिजिक्स टीचरज के प्रैजीटैड प्रोफैसर गौरडन रामसे ने अपनी 22 अगस्त 2018 की रिपोर्ट में लिखा है कि अजय के सुझाये प्रयोगों से न्यूटन की गति का तीसरा नियम गलत साबित हो सकता है।

(ii) स्प्रिंगर के जनरल ‘फाउडेशन आॅफ फिजिक्स’ के जनरल के फ्रांसीसी एडिटर-इन-चीफ प्रौफैसर कारलो रोबैली ने 10 जून 2018 की रिपोर्ट में लिखा है। कि अजय के प्रयोगों से न्यूटन के नियम की सम्भावित खामी दर्शायी जा सकती है।

(iii) 105वी इंडियन सांइस कांग्रेस 2018 के फिजिक्स सांइसिस के एडिटर ने भी अजय की शोध को प्रोसीडिग्ज में प्रकाषित किया है।
(vi) 4 दिसम्बर 2018 को इंडियन अकादमी आफ सांइसिज के जरनल ‘रेजोनेंस’ के एडिटर ने लिखा है कि अजय का कथन सही है कि न्यूटन के नियम को प्रयोग द्वारा परिमाणात्मक तौर सिद्ध करना आवष्यक हैं।
इस तरह विज्ञान जगत अजय के प्रयोगों की पुष्टि कर चुका है।

*प्र॰ 6:* तो इतने महत्वपूर्ण प्रयोग अब तक रूके क्यों है ?
*अजय शर्माः* इन प्रयोगों पर लगभग 8-10 लाख रुपये खर्च होगें ये प्रयोग इजनीयरिग रिसर्च की प्रयोगशाला में ही हो सकते हैं। मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, साइस एंड टैक्नोलोजी मंत्री डाॅ हर्ष वर्धन, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्धाज से प्रयोगों की सुविधाओं की मांग कर रहा हूँ।

*प्र॰7:*- लेकिन अन्तरिक्ष में जाने वाले राकेट भी न्यूटन के तीसरे नियम पर आधारित हैं।
*अजय शर्माः* रॉकेटों की खेज न्यूटन से लगभग 400 वर्ष पहले चीन में हो चुकी थी। अब वैज्ञानिक कहते है कि जो धुंआ, चिंगारिया, गैस आदि पीछे निकलती है, उसी से राकेट को आगे जाने के लिए धक्का लगता है। पर इस बात की परिमाणात्मक पुष्टि अभी तक इसरो, नासा ने नहीं की है। इस तरह न्यूटन का नियम यहां मोटे तौर पर ही सही है
दूसरी तरफ जब जहाज, हैलीकौप्टर उड़ते है तो उन्हें राकेट की तरह धुंआ, चिंगारिया, गैस आदि से कोई भी धक्का नहीं लगता है। तो खुद वैज्ञानिक न्यूटन के नियम को गलत साबित कर रहे हैं।

प्र॰8  इससे तो विज्ञान का आधारभूत ढांचा  ही बदल जाएगा ।
अजय शर्माः  अगस्त 2018 में एक अमरीकी वैज्ञानिक ने वाशिगटन कान्फरैस में कहा कि इन प्रयोगों की सफलता से भारत को नोबेल प्राइज मिल सकता है। इससे भारत का नाम दुनिया के हर स्कूल में जाएगा।
*Ajay Sharma*   Email   ajoy.plus@gmail.com, Mobile: *94184-50899*

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