Tuesday, 4 December 2012

आंखों में छिपा पासवर्ड


कोई भी दो व्यक्ति दुनिया को एक ही नजर से नहीं देखते। एक तस्वीर को देखते हुए लोग अलग-अलग ढंग से अपनी आंखें घुमाते हैं। यदि वे एक ही तरीके से तस्वीर को देखते हैं तो भी उनका आंखों को घुमाने का तरीका अलग होता है। अमेरिका में सेन मार्कोस स्थित टेक्सस स्टेट यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिक ओलेग कोमोगो‌र्त्सेव एक ऐसा सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो लोगों द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर देखने के ढंग के आधार पर उनकी पहचान करेगा। कोमोगो‌र्त्सेव के अनुसार लोगों के नजरें घुमाने के तरीके में दिखने वाला फर्क बायोमीट्रिक के लिए पर्याप्त है। बायोमीट्रिक शरीर के किसी हिस्से के आधार पर पहचान का एक पैमाना है। मिसाल के तौर पर फिंगरप्रिंट का उल्लेख किया जा सकता है। दुनिया भर के कंप्यूटर वैज्ञानिक अपराध सुलझाने और सीमा सुरक्षा के लिए बायोमीट्रिक्स पर रिसर्च कर रहे हैं। स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य उपकरणों के पासवर्ड के लिए भी बायोमीट्रिक विधियों के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। आंखों की हलचल का इस्तेमाल आंखों की पुतलियों के स्कैन जैसी प्रचलित बायोमीट्रिक विधियों में सुधार के लिए किया जा सकता है। हवाई अड्डों में और कुछ कंपनियों में इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। भारत में आधार कार्ड बनाने के लिए भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कुछ रिसर्चर प्रयोगों के जरिये यह दिखा चुके हैं कि प्रिंटेड कांटेक्ट लैंस से पुतलियों के स्कैनर को धोखा दिया जा सकता है। कोमोगो‌र्त्सेव का ख्याल है कि आंखों की हलचल रिकॉर्ड करने वाले स्कैनर से इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सकता है। भविष्य में आंखों की हलचल के स्कैन से सुरक्षाकर्मी यह पता लगा सकेंगे कि व्यक्ति मानसिक तौर पर परेशान या बीमार तो नहीं है। सुरक्षा अधिकारी अत्यंत सुरक्षा वाले संवेदनशील स्थानों में ऐसे व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित कर सकते हैं। भविष्य में आंखों की पुतलियों के स्कैनरों के साथ आंखों की हलचल के स्कैनर लगाने पर न सिर्फ व्यक्ति की पहचान की जा सकेगी, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति का भी अंदाजा किया जा सकेगा। कोमोगो‌र्त्सेव का कहना है कि हवाई अड्डों पर लोगों की पहचान के लिए आंखों की हलचल के स्कैनर लगाने से पहले कुछ बुनियादी सवालों का जवाब खोजना पड़ेगा। जैसे, यह पता लगाना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की आंखों में हलचल हमेशा एक जैसी रहती है या समय के साथ उसमे समय के साथ परिवर्तन होता रहता है। कोमोगो‌र्त्सेव की टीम अगले दो-तीन वर्षो के अंदर आंखों की हलचल को स्कैन करने वाली मशीन परीक्षण के लिए उपलब्ध करा सकती है। कोमोगो‌र्त्सेव का सिस्टम आंखों की हलचल को रिकॉर्ड करते हुए इस बात पर ध्यान देता है कि स्क्रीन के बिंदु पर किसी व्यक्ति की नजर कितनी देर तक स्थिर रहती है और विभिन्न बिंदुओं के बीच उसकी नजरें कितनी तेजी से दौड़ती हैं। इसके आधार पर यह सिस्टम लोगों की आंखों की मसल्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ताकत और आंखों की दूसरी खूबियों का भी अंदाजा कर सकता है। आदमी की पहचान करने के अलावा आंखों की हलचल के कुछ दूसरे उपयोग भी हैं। वैज्ञानिकों ने ऐसे उपकरण बना लिए हैं, जिनकी मदद से व्यक्ति सिर्फ अपनी आंखों की हलचल से कंप्यूटर और लैपटॉप का संचालन कर सकता है या आसपास किसी चीज को नियंत्रित कर सकता है। यह उपकरण उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो शरीर को पंगु करने वाली बीमारियों से पीडि़त हैं। यह उपकरण आंखों की हलचल को पढ़ कर यह हिसाब लगा लेता है कि व्यक्ति किसे देख रहा है। इस तरह सिर्फ आंखें घुमा कर कंप्यूटर स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित किया जा सकता है और इसके लिए माउस की जरूरत नहीं पड़ती।

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