Friday, 3 August 2012

क्यों नहीं रुकती फर्जी तकनीकी संस्थानों की बाढ़

शशांक द्विवेदी
नवभारतटाइम्स में 01/08/2012 को प्रकाशित 

तकनीकी शिक्षा का नया सेशन शुरू होने वाला है। देश के मैनेजमेंट और इंजिनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन इसी समय देश में तकनीकी शिक्षा से जुड़े फर्जी संस्थान भी सक्रिय हो जाते हैं और वे छात्रों को गलत जानकारियां देकर अपने यहां उनका एडमिशन करवाते हैं। पिछले दिनों ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने देश के 336 मैनेजमेंट और इंजिनियरिंग कॉलेजों को अवैध करार दिया था। बिना मान्यता के चल रहे इन कॉलेजों में से अधिकांश निजी क्षेत्र द्वारा संचालित हैं। इन कॉलेजों से मिली डिग्री और सर्टिफिकेट भी सरकारों द्वारा मान्य नहीं होंगे। एआईसीटीई की इस सूची में दिल्ली के 83, उत्तर प्रदेश के 17, हरियाणा के 15, चंडीगढ़ के छह, पंजाब के छह, उत्तराखंड के दो और हिमाचल प्रदेश का एक संस्थान शामिल है। ऐसे सर्वाधिक 123 कॉलेज महाराष्ट्र में हैं।



मान्यता का खेल
एआईसीटीई के इस कदम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि लगातार ऐसे कॉलेज क्यों खुल रहे हैं और एआईसीटीई को हर साल इस तरह की कार्रवाई क्यों करनी पड़ती है? पिछले दिनों मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा था कि देश में प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य बनाने के लिए सरकार इस साल संसद में एक महत्वपूर्ण विधेयक लाने पर विचार कर रही है। असल में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय मान्यता नियामक प्राधिकरण विधेयक में प्रावधान है, जिसके तहत प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करने से पहले उनकी मान्यता का मूल्यांकन होना जरूरी है। मौजूदा शिक्षण संस्थानों को भी तीन साल के भीतर मान्यता प्राप्त करनी होगी। विधेयक में एक राष्ट्रीय प्राधिकरण के गठन का भी प्रावधान है जो मान्यता एजेंसियों का पंजीकरण करेगा और उन पर निगरानी रखेगा। गुणवत्ता के लिहाज से देश में ऐसा कानून होना ही चाहिए, लेकिन यह विधेयक कब आएगा, पता नहीं।



रुके पड़े कानून
उच्च और तकनीकी शिक्षा में सुधार से जुड़ा एक और विधेयक अभी लंबित है, जबकि शिक्षा से जुड़े विधेयक जल्द से जल्द पारित होने चाहिए। मौजूदा नियमों के अनुसार देश में निजी संस्था द्वारा संचालित कोई भी कॉलेज या इंस्टीट्यूट एआईसीटीई की मान्यता के बिना प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा नहीं दे सकता। देश में लगभग चार हजार कॉलेज इस संस्था से मान्यता लेकर विभिन्न विषयों की शिक्षा दे रहे हैं। देश में बिना मान्यता के चल रही कई संस्थाएं विदेशी विश्वविद्यालयों से मान्यता लेने का दावा करती हैं लेकिन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में शिक्षा देने का वैधानिक अधिकार नहीं है। विदेशी विश्वविद्यालयों से मान्यता के संबंध में स्पष्ट कानून नहीं होने के कारण ऐसे फर्जी संस्थानों के संचालक कार्रवाई से बच जाते हैं। विदेशी संस्थाओं से मान्यता की आड़ में चल रहे फर्जी संस्थानों की संख्या इसीलिए बढ़ रही है। ऐसे संस्थान उन बड़े व्यापारिक घरानों, नेताओं और ठेकेदारों के व्यापार का एक हिस्सा हैं, जो तकनीकी शिक्षा के जरिये रुपया बनाना चाहते हैं।



एआईसीटीई देश में तकनीकी शिक्षा का एकमात्र नियामक है लेकिन उसके पास ऐसे संस्थानों पर समुचित का काअधिकार आज भी नहीं है। नियामक होने के नाते वह केवल नोटिस जारी कर सकता है। आगे की कार्रवाई काजिम्मा सरकारों और विश्वविद्यालयों का है, जिनकी आड़ में तकनीकी शिक्षा के मापदंड को पूरा न करने वालेसंस्थान चल रहे हैं। फर्जी संस्थान विश्वविद्यालयों से संबद्धता की आड़ लेकर या स्टडी सेंटर के नाम पर तकनीकीशिक्षा के नियमन को पूरा किए बिना चल रहे है। इसकी वजह से हजारों छात्र हर साल ठगे जा रहे हैं क्योंकिएआईसीटीई की मान्यता न होने से उनकी डिग्री को औपचारिक मान्यता नहीं मिल पाती और इसके अभाव मेंअच्छे संस्थान नौकरी देने से मना कर देते हैं।



दुनिया में युवाओं की संख्या भारत में सबसे अधिक है। इस हिसाब से शिक्षा की हालत भी उतनी ही बेहतर होनीचाहिए लेकिन ऐसी स्थिति फिलहाल यहां नहीं है। देश में फर्जी और अवैध संस्थानों के खुलने से छात्रों के भविष्यके साथ खिलवाड़ हो रहा है। ऐसे संस्थान आकर्षक तरीके से अपने आपको पेश करते है और विज्ञापनों के माध्यम सेअपना प्रचार करते है। जो लोग इनके चंगुल में एक बार फंस जाते हैं वे फिर कभी बाहर नहीं निकल पाते। गरीबअभिभावक तो आर्थिक रूप से भी पूरी तरह से टूट जाता है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इतने नियम-कानून होने केबाद भी ये संस्थान खुल कैसे जाते हैं। जाहिर सी बात है कि इन्हें कहीं न कहीं से प्रोत्साहन मिल रहा है औरकमजोर नियम-कानूनों के कारण इन्हें पकड़े जाने का भी डर नहीं है।



समाज भी जगे
तकनीकी शिक्षा को घुन की तरह खा रही इस समस्या पर सरकार को तत्काल ध्यान देना होगा क्योंकि अगर इसतरह के संस्थानों का खुलना जारी रहा तो आने वाले समय में ये तकनीकी शिक्षा की साख और गुणवत्ता को बड़ानुकसान पहुंचाएंगे। ऐसे संस्थानों को रोकने के लिए कठोर नियम और मानक बनाने होंगे और उन पर कड़ाई सेअमल सुनिश्चित करना होगा। समय आ गया है कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से ले क्योंकि यह देश केयुवाओं के भविष्य का सवाल है। सरकार के साथ-साथ समाज के स्तर पर भी लोगों में जागरूकता लाने के लिएप्रयास किए जाने चाहिए, तभी देश को ऐसे फर्जी और अवैध संस्थानों से मुक्ति मिल सकेगी और भारत की नईपीढ़ी को इनका शिकार होने से बचाया जा सकेगा।
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