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Saturday, 16 June 2012

ब्रह्मांड का रहस्य खोजने के करीब पहुँचे वैज्ञानिक

सफलता
सर्न के वैज्ञानिकों को मिली सफलता, ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्य से उठेगा पर्दा
ब्रह्मांड की उत्पत्ति खोजने में जुटे वैज्ञानिक गॉड पार्टिकल (हिग्स बोसोन) की खोज के करीब पहुँच चुके हैं। बिग बैंग थ्योरी के मुताबिक, इसी तत्व की मदद से पहले तारे फिर ग्रह और आखिरकार जीवन की उत्पत्ति हुई। पिछले कई सालों की प्रयासों के बाद वैज्ञानिकों के पास ढेर सारे आँकड़े उपलब्ध हो चुके हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जल्द ही गॉड पार्टिकल सामने आ सकता है। 

इस तत्व की खोज के लिए योरपियन ऑर्गेनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) लार्ज हेड्रोन कोलाइडर (एलएचसी) का इस्तेमाल कर रही है। यह कणों को तेजी से घुमाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी मशीन है। शोधकर्ताओं का मानना है कि जुलाई के मध्य में मेलबोर्न में होने वाली कॉन्फ्रेंस में वैज्ञानिक शोध-पत्र का खुलासा कर सकते हैं। सर्न के प्रवक्ता जेम्स गिलीस ने कहा कि इस शोध को गुप्त रखा जा रहा है। केवल कुछ प्रमुख लोग ही इन आँकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं। हमें जैसे ही कोई ठोस जानकारी प्राप्त होगी, उसे दुनिया के सामने रखा जाएगा।

वैज्ञानिकों ने कहा कि हिग्स बोसोन के मजबूत संकेत उसी ऊर्जा स्तर पर देखे जा रहे हैं, जो पिछले साल अस्थायी तौर पर देखे गए थे। हालाँकि इन अणुओं की जिंदगी इतनी अल्प है कि इन्हें इनके द्वारा छोड़े गए अवशेषों के आधार पर ही पकड़ा जा सकता है।
क्या है हिग्स बोसोन

भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के शोध को भौतिक जगत ने स्वीकार करते हुए उनके नाम पर एक उप-परमाण्विक कण का नाम "बोसोन" रखा है। सन १९२४ में बोस ने एक सांख्यिकीय गणना का जिक्र करते हुए एक पत्र आइंस्टीन के पास भेजा था, जिसके आधार पर बोस-आइंस्टीन के गैस को द्रवीकृत करने के सिद्धांत का जन्म हुआ। इस सिद्धांत के आधार पर ही प्राथमिक कणों को दो भागों में बाँटा जा सका और इनमें से एक का नाम बोसोन रखा गया, जबकि दूसरे का नाम इटली के भौतिक वैज्ञानिक इनरिको फैरमी के नाम पर रखा गया। दशकों बाद १९६४ में ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्स ने बिग बैंग के बाद एक सेकेंड के अरबवें हिस्से में ब्रह्मांड के द्रव्यों को मिलने वाले भार का सिद्धांत दिया, जो बोस के बोसोन सिद्धांत पर ही आधारित था। इसे बाद में "हिग्स-बोसोन" के नाम से जाना गया। दरअसल हिग्स बोसोन अंतिम प्राथमिक कण है, जिसे व्यावहारिक रूप में नहीं देखा गया है। बिग बैंग सिद्धांत ब्रह्मांड की उत्पत्ति को स्पष्ट करता है। बिग बैंग घटना १३.७५ अरब साल पहले हुई थी और इसे ही ब्रह्मांड की उम्र माना जाता है। (साभार -नई दुनियाँ )